@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (10 जुलाई, 2021)
भारत के शहर धीरे-धीरे कोविड-19 महामारी की विनाशकारी दूसरी लहर के कारण हुए लॉकडाउन से बाहर निकल रहे हैं और टीकाकरण की गति को भी धीरे-धीरे बढ़ाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायरस के अधिक संक्रमणीय रूप सामने आए हैं, जिसमें डेल्टा वेरिएंट सबसे अधिक चिंताजनक है। यह पहली बार भारत में पिछले अक्टूबर में रिपोर्ट किया गया था और तब से 100 से अधिक देशों में फैल गया है।
नई चर्चा में, भारत में कोविड के नए वेरिएंट कप्पा के कुछ मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में 109 सैंम्पल की जीनोम सीक्वेंसिंग के दौरान इसका पता चला था। कोविड के कप्पा वेरिएंट से पॉजिटिव हुए रोगियों में से एक, यूपी के संत कबीर नगर के 66 वर्षीय व्यक्ति की मृत्यु हो गई।
कोविड का कप्पा वेरिएंट म्यूटेशन के बी.1.617 कॉन्टस्टेलेशन से जुड़ा हुआ है। यह पहली बार भारत में पाया गया था, जिसने डेल्टा वेरिएंट को जन्म दिया है। इस वायरस को पहली बार अक्टूबर 2020 में देश में रिपोर्ट किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने मई के अंत में इस वेरिएंट को कप्पा का नाम दिया। इस वेरिएंट में एक दर्जन से ज्यादा म्यूटेशन पाए गए हैं, जिनमें से दो की पहचान की गई है-E484Q और L452R। इसी वजह से कप्पा को “डबल म्यूटेंट” भी कहा जाता है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal





