@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
सुप्रीम कोर्ट ने आज एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र को आदेश दिया है कि कोरोना से मृतकों के परिजनों को मुआवजा दें। इसके लिए केंद्र छह हफ्तों के भीतर राज्य सरकारों को निर्देश जारी करे। हालांकि मुआवजे की राशि कितनी हो यह केंद्र खुद तय करे। सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में यह भी माना कि मुआवजे की राशि चार लाख नहीं हो सकती।साथ ही केंद्र को निर्देश दिया कि मृत्यु प्रमाण पत्र पाने की प्रक्रिया को भी सरल किया जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को कहा कि वह एक ऐसा सिस्टम बनाए, जिससे कम से कम ही सही, लेकिन पीड़ितों को मुआवजा दिया जाए। वहीं केंद्र को यह भी निर्देश दिया है कि वह कोविड से जुड़े मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करे, जो प्रमाण पत्र पहले ही जारी हो गए हैं, उनमें सुधार किया जाए।
Supreme Court directs the Union of India to frame guidelines to pay ex-gratia compensation to the families of those who died due to COVID19 pic.twitter.com/kDL16dtCwv
— ANI (@ANI) June 30, 2021
इस मामले में केंद्र सरकार का कहना था कि सरकारी संसाधनों की मुआवजा देने की एक सीमा होती है। अगर इस तरह से मुआवजा दिया गया तो वर्ष 2021-22 के लिए राज्य आपदा राहत कोष (एसडीआरएफ) के लिए आवंटित राशि 22184 करोड़ रुपये इस मद में ही खर्च हो जाएंगे और इससे महामारी के खिलाफ लड़ाई में उपयोग होने वाली राशि प्रभावित होगी।
केन्द्र ने साफ तौर पर कहा कि चार लाख रुपये की मुआवजा राशि सरकारों की वित्तीय सामर्थ्य से परे है। उधर पहले से ही राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के वित्त पर भारी दबाव है। केंद्र सरकार ने वकील गौरव बंसल और दीपक कंसल द्वारा दायर उन याचिकाओं पर दिया है। जिसमें कोविड -19 महामारी से मारे गए लोगों के परिवार के सदस्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत चार लाख रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है। अब इस मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

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