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मिसाल: एक गांव जहां कोरोना घुस भी नहीं पाया

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो

छत्तीसगढ़ का एक ऐसा गांव जहां आज तक एक भी कोरोना मरीज नहीं मिला, दूसरा गांव जहां अचानक विकराल हुए कोरोना को युद्ध स्तर का प्रयास कर कोरोना पूरी तरह से भगा दिया गया। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले से आई ये कहानियां महामारी में एक भरोसा तो देती ही हैं।

महासमुंद जिले में बागबाहरा ब्लॉक के धामनतोरी गांव में 532 लोगों की आबादी है। यह गांव छोटे किसानों और खेतिहर मजदूरों से भरा हुआ है। लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि यह गांव आज तक कोरोना संक्रमण से मुक्त रहा है। कोरोना की दूसरी विकराल लहर इस गांव को छू भी नहीं पाई।

गांव के लोगों ने तीन महीने तक दो रास्तों को पूरी तरह से बंद किए रखा। एक रास्ते पर सख्त पहरा लगा कर, रजिस्टर में नाम दर्ज कर, सिर्फ जरूरी काम के लिए लोगों को गांव से बाहर जाने की इजाजत दी गई। बाहरी व्यक्तियों का गांव में प्रवेश सख्त प्रतिबंधित किया गया। शादी-ब्याह-शोक कार्यक्रम बेहद सख्ती एवं सावधानी से संपन्न हुए।

बारह परिवारों को पलायन से रोका गया, गांव में ही रोजी मजदूरी की व्यवस्था की गई, गरीब परिवारों के लिए जन-सहयोग से राशन, सब्जी और जलावन लकड़ी की व्यवस्था की गई। जो परिवार बाहर से लौटे, उन्हें गांव के बाहर क्वारेन्टाइन रखने के बाद ही प्रवेश मिला। सोशल डिस्टेसिंग, मास्क पहनना और हाथ धोने का पूरे गांव ने सख्ती से पालन किया।

ठीक इससे अलग  बकमा गांव की आबादी 2586 लोगों की है। इस गांव में कई लोग कोरोना संक्रमित हुए। लेकिन जागरूक लोगों की वजह से घर-घर में टेस्ट हुआ, बीमारों को अस्पताल पहुंचाया गया। वैक्सीनेशन के लिए जन जागरण करने के साथ साथ मजबूत टीम बनाई गई। दूसरे राज्यों से आए 59 मजदूरों को क्वारेंटीन सेंटर में रखा गया। आज परिणाम ये है कि कोरोना गांव से भाग चुका है।

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