@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
कोरोना वायरस के इलाज में इस्तेमाल की जा रही प्लाज्मा थेरेपी को हटा दिया गया है। यह फैसला इंडियन कॉउन्सिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की नेशनल कोविड टास्क फोर्स की सिफारिश पर लिया गया है।
कुछ दिन पहले कोविड पर बनी नेशनल टास्कफोर्स की मीटिंग में इस पर चर्चा हुई थी। इसमें कहा गया था कि प्लाज्मा थेरेपी से मरीज को कोई फायदा नहीं होता है। टास्क फोर्स का कहना है कि कोरोना के मरीजों में सुधार को लेकर इसके ठोस परिणाम नहीं मिले। इस थेरेपी को हटाने के क्या मायने हैं और ये फैसला क्यों किया गया?
प्लाज्मा को लेकर किए गए ट्रायल की प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर और आईसीएमआर की साइंटिस्ट डॉक्टर अपर्णा मुखर्जी ने बताया कि भारत, यूके अमेरिका, अर्जेंटीना की रिकवरी ट्रायल (11000 मरीजों पर) सबको मिलाकर एनालिसिस करने पर देखा गया कि इससे कोई फायदा नहीं हो रहा है। भारत में पिछले साल अप्रैल से अगस्त तक ट्रायल चला था।
इससे होने वाले नुकसान के बारे में मुखर्जी ने कहा, इससे नुकसान थियोरिटिकली हो सकता है, पर इसको लेकर हमारे पास कोई सबूत नहीं हैं। लेकिन गंभीर मरीज को यह थेरेपी देने का कोई फायदा नहीं दिखाई दिया।
जब उनसे पूछा गया कि लोगों का कहना है कि उनके मरीज को इससे फायदा हुआ है। तो उन्होंने कहा कि कोई भी दवाई देंगे तो किसी में सुधार हो सकता है, किसी में नहीं। इसलिए ही इसका अध्ययन किया जाता है। किसी भी चीज का असर और सुधार कई और वजह से भी हो सकता है।

Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal