@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो
ब्रिटेन और अमेरिका के प्रमुख वैज्ञानिकों के एक समूह ने कोविड-19 महामारी की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए और अधिक जांच का आह्वान किया जिसमें चीन के वुहान शहर स्थित प्रयोगशाला से वायरस के दुर्घटनावश बाहर आने की धारणा भी शामिल है। इन वैज्ञानिकों में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के प्रतिरक्षा विज्ञान एवं संक्रामक रोग विशेषज्ञ भारतीय मूल के रवींद्र गुप्ता शामिल हैं।
”साइंस” पत्रिका में प्रकाशित एक पत्र में हार्वर्ड, स्टैनफोर्ड और एमआईटी जैसे दुनिया के प्रमुख विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के प्रकोपों के जोखिम को कम करने के लिए वैश्विक रणनीतियों बनाने के वास्ते यह जानना जरूरी है कि कोविड-19 कैसे उभरा। इन विशेषज्ञों ने आगाह किया कि जब तक पर्याप्त आंकड़े न हों तब तक प्राकृतिक तरीके से और प्रयोगशाला से वायरस के फैलने के बारे में परिकल्पनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने लिखा है, ‘‘प्रासंगिक विशेषज्ञता वाले वैज्ञानिकों के रूप में, हम विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक, अमेरिका और 13 अन्य देशों एवं यूरोपीय संघ से सहमत हैं कि इस महामारी की उत्पत्ति के बारे में अधिक स्पष्टता प्राप्त करना आवश्यक और संभव है। जब तक पर्याप्त आंकड़े न हों तब तक प्राकृतिक तरीके से और प्रयोगशाला से वायरस के फैलने के बारे में परिकल्पनाओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।”
महामारी के इतिहास उल्लेख करते हुए वैज्ञानिकों ने याद किया कि किस तरह 30 दिसंबर, 2019 को प्रोग्राम फॉर मॉनिटरिंग इमर्जिंग डिजीज ने दुनिया को चीन के वुहान में अज्ञात कारणों से होने वाले निमोनिया के बारे में सूचित किया था। इससे कारक प्रेरक एजेंट सीवीयर एक्यूट रेसपीरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस 2 (एसएआरएस-सीओवी-2) की पहचान हुई थी।

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