@शब्द दूत ब्यूरो
केंद्र सरकार के शीर्ष वैज्ञानिक सलाहकार ने कहा है कि यदि जरूरी कदम उठाए गए तो भारत कोरोना वायरस की तीसरी लहर को ‘चकमा’ देने में सफल हो सकता है। डॉ. के विजयराघवन ने कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की चेतावनी देने के दो दिन बाद यह बात कही है। उन्होंने कहा, ‘यदि हमने कठोर कदम उठाए तो कोरोना की तीसरी लहर सभी स्थानों पर या फिर कहीं नहीं आएगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि स्थानीय स्तर पर गाइडलाइंस को, राज्यों, जिलों और शहरों में कितने प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।’
इससे पहले डॉ. विजयराघवन ने कहा था, ‘वायरस जिस तेजी से फैल रहा है, उसे देखते हुए कोरोना की तीसरी लहर को टाला नहीं जा सकता लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि यह लहर कब आएगी।’ उन्होंने कहा था कि कोरोना के केसों में मौजूदा बढ़ोत्तरी का कारण इंडियन डबल म्यूटेंट माना जा रहा है और अब यूके वेरिएंट का असर कम हो चुका है। उन्होंने कहा था कि यह स्पष्ट नहीं है कि यह फेज 3 कब आएगा। लेकिन हमें तीसरी लहर को लेकर सचेत रहना होगा। वैक्सीन को अपग्रेड किए जाने पर निगरानी रखे जाने की जरूरत है।’ उन्होंने कहा कि हमने राज्य सरकारों को जानकारी देकर जरूरी कदम उठाने को कहा है। यूके वरिएंट का असर अब कम हो रहा और नए वेरिएंट प्रभाव दिखा रहे हैं।
इधर, कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ी है। अस्पतालों को बेड्स और ऑक्सीजन की कमी से जूझना पड़ रहा है। ऑक्सीजन के कमी के कारण कई मरीजों को जान गंवानी पड़ी है। मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि देश में कोरोना के कारण वास्तविक रूप से हुई मौतों की संख्या, आधिकारिक आंकड़ों से 5 से 10 गुना अधिक है। कोरोना की दूसरी लहर के मद्देनजर समय रहते कदम न उठाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार की आलोचना हो रही है। त्यौहार, धार्मिक उत्सवों और राजनीतिक रैलियों को संक्रमण फैलने का मुख्य कारण माना जा रहा है।

Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal