काशीपुर । नगर निगम काशीपुर द्वारा दो प्रतिशत दाखिल खारिज शुल्क वसूलने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दर्ज की गई है। जिस पर न्यायालय ने सरकार से चार हफ्ते में जबाब मांगा है।
समाजसेवी दीपक बाली ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि काशीपुर वासियों से नगर निगम दाखिल खारिज को लेकर दो प्रतिशत शुल्क वसूल रहा था। जिस पर उन्होंने हाईकोर्ट में पी आई एल दाखिल की। न्यायालय द्वारा पीआईएल को लेकर कहा गया कि इस मामले में वही व्यक्ति याचिका दायर कर सकता है जिससे यह शुल्क वसूला जा रहा है।
तब नगर निवासी शक्ति अग्रवाल ने हाईकोर्ट में अपने मकान पर दो प्रतिशत दाखिल खारिज शुल्क वसूलने पर निगम के विरूद्ध याचिका न्यायालय में दाखिल की थी। जिसे उच्च न्यायालय ने स्वीकार कर लिया तथा सरकार से चार सप्ताह में जबाब दाखिल करने का आदेश दिया है।
बता दें कि काशीपुर में जब नगरपालिका बोर्ड था तब तत्कालीन पालिकाध्यक्ष के कार्यकाल में यह प्रस्ताव पारित किया गया था। हालांकि उसके बाद 2013 में काशीपुर को नगर निगम बना दिया गया। जानकारों का कहना है कि नगर निगम द्वारा किसी भी बोर्ड बैठक में दो प्रतिशत दाखिल खारिज शुल्क वसूलने का प्रस्ताव पास नहीं किया गया। ऐसे में यह शुल्क जनता से वसूलना तर्कसंगत नहीं है।
वहीं नगर की जनता लंबे समय से काशीपुर नगरनिगम द्वारा इस शुल्क की वसूली का विरोथ करती आ रही है। यहाँ यह भी गौरतलब है कि उत्तराखंड में एकमात्र काशीपुर नगर निगम में ही यह शुल्क वसूला जा रहा है।
सहायक नगर निगम आयुक्त आलोक उनियाल ने शब्द दूत को बताया कि यह तर्क गलत है कि दो प्रतिशत का दाखिल खारिज शुल्क नगरपालिका बोर्ड ने तय किया था इसलिए नगर निगम उसको लागू नहीं कर सकता। उनके मुताबिक नगरपालिका से अपग्रेड होकर नगर निगम बनने पर नोटिफिकेशन वही रहते हैं जो नगरपालिका बोर्ड ने लागू किये थे। उनका कहना है कि कल को लोग हाउस टैक्स भी देना बंद कर देंगे।



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