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काशीपुर : स्वार्थ और फर्जी समाजसेवा की राजनीति को बदल कर नयी राजनीति का चेहरा बने दीपक बाली

@शब्द दूत ब्यूरो (04 अप्रैल 2026)

काशीपुर।  महापौर चुने जाने के बाद दीपक बाली की कार्यशैली ने एक बार फिर उस दौर की याद ताजा कर दी है, जब राजनीति को निजी स्वार्थ नहीं बल्कि जनसेवा का माध्यम माना जाता था। आज के समय में जहां अक्सर राजनीति पर आरोप लगता है कि समाजसेवा के नाम पर सत्ता में आकर कुछ ही वर्षों में लोग आर्थिक रूप से अत्यधिक संपन्न हो जाते हैं, वहीं दीपक बाली का कार्यकाल इस धारणा से अलग एक अलग ही कहानी प्रस्तुत करता दिखाई देता है।

स्थानीय स्तर पर चर्चा यह भी है कि आम जनता लंबे समय से यह समझ नहीं पाई कि राजनीति और समाजसेवा के नाम पर अचानक बढ़ती आर्थिक समृद्धि का “चमत्कार” कैसे होता है, लेकिन काशीपुर में मौजूदा परिदृश्य इस बहस को एक अलग दिशा देता है। यहां फोकस व्यक्तिगत लाभ पर नहीं, बल्कि कार्यों की गति और उनकी जमीन पर दिखाई देने वाली प्रभावशीलता पर अधिक नजर आ रहा है।

महापौर बनने के बाद दीपक बाली ने जिस प्रकार शहर की समस्याओं के समाधान के लिए सक्रियता दिखाई है, उससे यह धारणा बनी है कि वे केवल अपने अधिकार क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि हर जनसमस्या के समाधान के लिए रास्ता निकालने का प्रयास करते हैं। यही वजह है कि उनके एक वर्ष के कार्यकाल को लेकर शहर में लगातार चर्चाएं बनी हुई हैं।

नगर निगम और सार्वजनिक मंचों पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक वर्ष के भीतर करीब 121 करोड़ रुपये की विकास योजनाएं सामने आई हैं, जिनमें से 100 करोड़ रुपये से अधिक के कार्यों के धरातल पर उतरने का दावा किया जा रहा है।

मार्च 2025 में लगभग 110.56 करोड़ रुपये की 19 परियोजनाओं का शुभारंभ/शिलान्यास हुआ। इसके बाद 23.27 करोड़ रुपये की लागत से 147 सड़कों की योजनाएं घोषित की गईं। अप्रैल, मई और सितंबर 2025 में भी करोड़ों रुपये की लागत से कई सड़क निर्माण कार्य शुरू किए गए।

इस कार्यकाल की खास बात यह रही कि विकास केवल बड़ी परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मोहल्लों और वार्ड स्तर तक पहुंचा। सड़कों, नालियों, जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसे बुनियादी कार्यों को प्राथमिकता दी गई, जिससे आम नागरिक को सीधे राहत मिलती दिखाई दी।

चुनाव के दौरान किए गए संकल्प को अमल में लाते हुए 800 से अधिक सड़कों के निर्माण/शिलान्यास की बात सामने आई है। मां बाल सुंदरी मंदिर तक जाने वाली सड़क का निर्माण भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जिससे पहली बार धार्मिक यात्रा पक्की सड़क से संभव हो सकी।

महापौर ने विकास को केवल सड़क निर्माण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि ड्रेनेज, पेयजल, कंट्रोल रूम, पशु शवदाह गृह, स्वास्थ्य, शिक्षा और यातायात जैसी व्यवस्थाओं में सुधार पर भी ध्यान दिया। इससे नगर निगम के कार्यों में व्यापकता दिखाई देती है।

कुल मिलाकर काशीपुर में महापौर दीपक बाली का कार्यकाल केवल घोषणाओं तक सीमित नहीं बल्कि जमीन पर दिखने वाले विकास के रूप में उभर रहा है। अब आगे की सबसे बड़ी कसौटी यही होगी कि घोषित योजनाओं को तय समय और गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए, ताकि यह मॉडल लंबे समय तक टिकाऊ साबित हो सके।

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