@शब्द दूत ब्यूरो (03 अप्रैल 2026)
उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक भावुक और राजनीतिक संकेतों से भरी पोस्ट साझा कर अपने समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि वह केवल “एक छोटा अर्जित अवकाश” ले रहे हैं और इसे लेकर किसी भी प्रकार का पक्ष-विपक्ष खड़ा नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि 59 वर्षों से अधिक समय तक निरंतर कर्तव्यरत रहने के बाद थोड़ा विराम लेना उनका स्वाभाविक अधिकार है, लेकिन इससे उनके राजनीतिक संकल्प, पार्टी निष्ठा और सक्रियता पर कोई प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जाना चाहिए।
हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में बड़े भावुक और संयमित शब्दों का प्रयोग करते हुए लिखा कि इतने लंबे “परिणय-सूत्र बंधन” जैसे राजनीतिक और वैचारिक सफर में कभी-कभी ऐसे क्षण भी आते हैं, जब व्यक्ति को थोड़ी असहजता महसूस हो सकती है, मगर उन स्थितियों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझना चाहिए। उन्होंने खास तौर पर कहा कि उनके इस “अर्जित अवकाश” को लेकर अनावश्यक बहस या गुटबंदी न की जाए। उन्होंने वरिष्ठ कांग्रेस नेता गोविंद सिंह कुंजवाल का नाम लेते हुए कहा कि उनसे उनका लंबा मानसिक और भावनात्मक संबंध रहा है, इसलिए उनके शब्द स्वाभाविक हैं। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कुछ ऐसे लोग भी होंगे जिन्होंने उन्हें भाई या पिता तुल्य माना होगा और उनकी भावनाएं भी स्वाभाविक हैं, लेकिन फिर भी वह सबसे क्षमा चाहते हैं।
अपने लंबे राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए हरीश रावत ने कहा कि 59 वर्षों की अथक यात्रा के दौरान उन्हें हमेशा इस बात का स्मरण रहा कि वह सबसे पहले पार्टी के एक कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के सर्वोच्च नेतृत्व का निर्णय उन्होंने हमेशा शिरोधार्य किया है। यदि कभी उन्होंने विनती या आग्रह किया भी होगा, तो अंततः शीर्ष नेतृत्व के निर्णय को ही स्वीकार किया है। इस बयान के जरिए हरीश रावत ने साफ संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आज भी पहले जैसी ही मजबूत है। उन्होंने यह भी कहा कि यह लंबा व्रत अब संकल्प का रूप ले चुका है और यह न टूटेगा, न बदलेगा।
अपनी पोस्ट के सबसे भावुक हिस्से में हरीश रावत ने 2027 की राजनीति की ओर संकेत करते हुए पार्टी के युवाओं और भावी नेतृत्व को खुला संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिन नौजवानों को 2027 में अपने लिए संभावनाएं दिखाई दे रही हैं, उनसे वह कहना चाहते हैं कि यदि महर्षि दधीचि की तरह उनके भविष्य को संवारने के लिए उनकी “हड्डियों” की भी जरूरत पड़े, तो हरीश रावत की हड्डियाँ भी उनके लिए हमेशा उपलब्ध रहेंगी। यह पंक्ति राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे उन्होंने एक ओर अपनी सक्रिय भूमिका बनाए रखने का संकेत दिया, तो दूसरी ओर युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाने की इच्छा भी जाहिर की।
हरीश रावत ने यह भी स्पष्ट किया कि अवकाश के दौरान भी वह पूरी तरह निष्क्रिय नहीं हैं, बल्कि लगातार सक्रिय हैं और “अपनी हड्डियाँ घिस” रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में उनका अनेक लोगों, समूहों, क्षेत्रों, विचारधाराओं और जन-अपेक्षाओं से गहरा जुड़ाव रहा है। जीवन के इस मोड़ पर उन्हें उन सभी से परामर्श की भी आवश्यकता महसूस हो रही है और वह उनके बीच जाकर अपने जुड़ाव को फिर से दोहराना चाहते हैं। उन्होंने अंत में उन सभी समीक्षकों और लोगों का आभार भी जताया जो उन्हें लेकर उत्सुकता रखते हैं।
हरीश रावत की यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब उत्तराखंड कांग्रेस में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर अंदरूनी हलचल, संभावित नेतृत्व और राजनीतिक पुनर्संरचना को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ऐसे में उनके “अर्जित अवकाश” वाले बयान को केवल निजी भावुकता नहीं, बल्कि एक बड़े राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। फिलहाल इतना तय है कि हरीश रावत ने अपनी इस पोस्ट के जरिए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह राजनीति से अलग नहीं हुए हैं, बल्कि थोड़े विराम के साथ भी कांग्रेस और अपने वैचारिक संकल्प के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं।
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