@शब्द दूत ब्यूरो (31 मार्च 2026)
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि किसी कर्मचारी से लंबे समय तक लगातार काम लिया जाता है, तो उस पद को स्थायी माना जाएगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि लंबी अवधि तक सेवा लेना इस बात का प्रमाण है कि उस पद पर नियमित नियुक्ति की आवश्यकता थी।
न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने यह फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और प्रभावित कर्मचारियों की बहाली का निर्देश दिया। यह मामला कानपुर नगर निगम के स्विचमैन कर्मचारियों से जुड़ा था, जो वर्षों तक निरंतर कार्यरत रहे थे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी 12-13 वर्षों तक लगातार काम करता है, तो उसे अस्थायी मानना उचित नहीं है और उसे अचानक नौकरी से नहीं हटाया जा सकता। अदालत के अनुसार, इतनी लंबी सेवा यह दर्शाती है कि संबंधित कार्य स्थायी प्रकृति का था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि संस्थान आवश्यक रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं करता, तो कर्मचारी के दावे को सही माना जाएगा। इसे कानून में ‘प्रतिकूल अनुमान’ कहा जाता है, जिसमें दस्तावेज न देने की जिम्मेदारी नियोक्ता की मानी जाती है।
हालांकि, अदालत ने बकाया वेतन के मुद्दे पर अंतिम निर्णय के लिए मामला दोबारा उच्च न्यायालय को भेज दिया है, ताकि यह देखा जा सके कि सेवा समाप्ति के बाद कर्मचारी कहीं और कार्यरत थे या नहीं।
इस फैसले को देशभर के संविदा और अस्थायी कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
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