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उत्तराखंड विधानसभा में उठी जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग, डेमोग्राफी चेंज पर छिड़ी नई राजनीतिक बहस

@शब्द दूत ब्यूरो (13 मार्च 2026)

गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के सत्र के दौरान राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाए जाने की मांग ने एक नई राजनीतिक और सामाजिक बहस को जन्म दे दिया है। रुद्रपुर से भाजपा विधायक शिव अरोरा ने सदन में यह मुद्दा उठाते हुए राज्य में तेजी से बदल रही जनसांख्यिकी (डेमोग्राफी) पर चिंता व्यक्त की और सरकार से इस पर ठोस नीति बनाने की मांग की।

विधानसभा में अपनी बात रखते हुए विधायक शिव अरोरा ने कहा कि उत्तराखंड में एक वर्ग विशेष की आबादी तेजी से बढ़ रही है, जिससे भविष्य में राज्य के सामाजिक और आर्थिक संतुलन पर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य में मुस्लिम आबादी लगभग 14 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर करीब 18 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

उन्होंने विशेष रूप से तराई क्षेत्र के जिलों का उल्लेख करते हुए कहा कि हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून और नैनीताल जैसे जिलों में मुस्लिम आबादी तेजी से बढ़ रही है। उनके अनुसार हरिद्वार में लगभग 38 प्रतिशत, ऊधम सिंह नगर में करीब 34 प्रतिशत, देहरादून में लगभग 33 प्रतिशत और नैनीताल में करीब 32 प्रतिशत मुस्लिम आबादी बताई जा रही है।

तीन से अधिक बच्चों पर योजनाओं से वंचित करने की मांग

विधायक अरोरा ने कहा कि राज्य में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू किया जाना चाहिए और जिन परिवारों के तीन से अधिक बच्चे हों, उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ न दिया जाए। उन्होंने कहा कि गैस, राशन, आवास और अन्य सब्सिडी वाली योजनाओं का अधिक बोझ राज्य के बजट पर पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते जनसंख्या नियंत्रण पर कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में यह देवभूमि उत्तराखंड के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।

अन्य भाजपा विधायकों का भी मिला समर्थन

सदन में यह मुद्दा उठने के बाद कुछ अन्य भाजपा विधायकों ने भी इस मांग का समर्थन किया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या धामी सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और मदरसा बोर्ड जैसे फैसलों की तर्ज पर जनसंख्या नियंत्रण कानून पर भी कोई पहल कर सकती है।

हिमाचल से तुलना भी की गई

चर्चा के दौरान हिमाचल प्रदेश का उदाहरण भी दिया गया। बताया गया कि 1971 में हिमाचल राज्य बनने के समय वहां मुस्लिम आबादी लगभग 2 प्रतिशत थी और आज भी लगभग उतनी ही बनी हुई है। इसके विपरीत उत्तराखंड में पिछले 25 वर्षों में मुस्लिम आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमाचल प्रदेश में बाहरी लोगों के भूमि खरीदने पर प्रतिबंध होने के कारण वहां की जनसंख्या संरचना अपेक्षाकृत स्थिर रही है, जबकि उत्तराखंड में ऐसी व्यवस्था नहीं है।

कांग्रेस ने लगाया राजनीतिक ध्रुवीकरण का आरोप

भाजपा विधायक की मांग पर कांग्रेस विधायक काजी निजामुद्दीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा एक वर्ग विशेष को निशाना बनाती है। उन्होंने कहा कि देश में शायद ही कोई मुस्लिम परिवार होगा जिसके 25 बच्चे हों और इस तरह की बातें समाज में अनावश्यक तनाव पैदा करती हैं।

विशेषज्ञों की राय

जनसंख्या विषय पर शोध करने वाले विशेषज्ञ मनु गौड़ का कहना है कि केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून पर गंभीर चर्चा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में यह मुद्दा उठने के बाद इस पर व्यापक जनमत और नीति स्तर पर विचार होना चाहिए।

क्या बोले मुख्यमंत्री धामी

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग विधायक शिव अरोरा का निजी विचार है और इस विषय पर अभी और वैचारिक मंथन की आवश्यकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड में डेमोग्राफी परिवर्तन का मुद्दा सरकार के संज्ञान में है और राज्य की सांस्कृतिक पहचान तथा सामाजिक संतुलन बनाए रखने के लिए सरकार सजगता से काम कर रही है।

तराई क्षेत्र में अवैध बसावट भी चिंता का विषय

विधायक शिव अरोरा ने अपने क्षेत्र ऊधम सिंह नगर की स्थिति का भी जिक्र करते हुए कहा कि जसपुर, किच्छा, गदरपुर, खटीमा, रुद्रपुर और काशीपुर जैसे क्षेत्रों में सरकारी भूमि पर अवैध बसावट एक बड़ी समस्या बन चुकी है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र की जनसंख्या संरचना और संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है।

फिलहाल विधानसभा में उठे इस मुद्दे के बाद उत्तराखंड की राजनीति में जनसंख्या नियंत्रण और डेमोग्राफी का विषय एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण बहस का कारण बन सकता है।

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