@शब्द दूत ब्यूरो (24 फरवरी 2026)
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने मंगलवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में एक महत्वपूर्ण फैसला किया है। इस फैसले के अंतर्गत केरल राज्य का नाम आधिकारिक तौर पर “केरलम (Keralam)” में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई पीएमओ बिल्डिंग सेवा तीर्थ में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया, जो राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले आया है।
केरल विधानसभा ने पहले ही इस बड़े कदम का समर्थन करते हुए एक सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया था, जिसमें केंद्र से अनुरोध किया गया था कि संविधान के पहले शेड्यूल तथा आठवीं अनुसूची में राज्य का नाम “केरलम” के रूप में शामिल किया जाए। संशोधित प्रस्ताव को गृह मंत्रालय द्वारा तकनीकी सुझावों के बाद फिर से पेश किया गया, जिसे अब मंजूरी मिल गई है।
राज्य सरकार और समर्थकों का कहना है कि मलयालम भाषा में राज्य का मूल नाम “केरलम” ही है, जबकि ‘केरल’ अंग्रेज़ी में उसका रूपांतरित नाम हुआ, जो औपनिवेशिक काल में प्रचलित हुआ। इस बदलाव को सांस्कृतिक और भाषाई पहचान को सम्मान देने वाला कदम बताया जा रहा है।
हालांकि यह नामकरण प्रतीकात्मक माना जाता है और इससे प्रशासनिक ढांचे या सरकारी दस्तावेजों में बड़े स्तर पर बदलाव नहीं आएगा, पर यह निर्णय राज्य की पहचान को उसकी स्थानीय भाषा और इतिहास के करीब लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।
नाम “केरलम” का अर्थ और इतिहास
‘केरलम’ शब्द का मूल मलयालम भाषा से जुड़ा है, जिसमें यह राज्य को विशेष रूप से संदर्भित करता है। ऐतिहासिक रूप से यह नाम उस क्षेत्र की भौगोलिक, सांस्कृतिक और भाषाई पहचान का प्रतीक रहा है, जिसे स्थानीय समुदाय “केरलम” के रूप में जानते आए हैं।
अब औपचारिक तौर पर संविधान और सभी सरकारी दस्तावेजों में भी यह नया नाम अपनाया जाएगा, जिससे राज्य की पहचान उसकी भाषा और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप होगी।
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