@शब्द दूत ब्यूरो (18 फरवरी 2026)
काशीपुर/देहरादून। उत्तराखंड युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता आनंद रावत ने ‘शब्द दूत’ से विशेष बातचीत में भारतीय जनता पार्टी के चुनावी नारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद दो बड़े चुनावी उद्घोषों ने देश की दिशा तय की। पहला नारा था “जय जवान, जय किसान”, जिसने 60-70 के दशक में जनमानस पर गहरी छाप छोड़ी, और दूसरा 21वीं सदी में कांग्रेस का नारा “कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ”, जिसने आम लोगों को सशक्त बनाने का काम किया।
रावत ने कहा कि “जय जवान, जय किसान” केवल नारा नहीं था, बल्कि उस सोच का प्रतीक था जिसके आधार पर कांग्रेस सरकारों ने नीतियां बनाईं। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना को मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए गए, जिसके परिणामस्वरूप 1962, 1965, 1971 और कारगिल जैसे युद्धों में भारत ने अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया। उत्तराखंड के परिप्रेक्ष्य में कुमाऊं रेजीमेंट, गढ़वाल रेजीमेंट और गोरखा रेजीमेंट का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सैनिकों के पुनर्वास के लिए सैनिक कल्याण बोर्ड के माध्यम से आर्थिक सहायता, बेटियों की शादी के लिए अनुदान और उच्च शिक्षा में आरक्षण जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं।
किसानों के मुद्दे पर बोलते हुए आनंद रावत ने कहा कि आजादी के बाद देश खाद्यान्न संकट और अकाल से जूझ रहा था, लेकिन कांग्रेस सरकारों ने बड़े बांधों जैसे भाखड़ा नांगल परियोजना का निर्माण कराया, हरित क्रांति चलाई और पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों की स्थापना कर किसानों को सशक्त बनाया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से देश आत्मनिर्भर बना।
वहीं 2014 के बाद भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए रावत ने कहा कि “अच्छे दिन” का वादा पूरा नहीं हुआ। उन्होंने अग्निवीर योजना को लेकर चिंता जताई और कहा कि इससे युवाओं में सेना के प्रति पहले जैसा उत्साह नहीं रहा। उनका आरोप था कि अग्निवीर के तहत भर्ती जवानों को न तो पेंशन मिलेगी और न ही पूर्व सैनिकों जैसी सुविधाएं, जिससे युवा हतोत्साहित हो रहे हैं।
किसानों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि 2022 तक आय दोगुनी करने का वादा अधूरा है। एमएसपी को लेकर भी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। साथ ही संभावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों का हवाला देते हुए कहा कि यदि विदेशी कृषि उत्पाद कम टैक्स पर भारत आएंगे तो इससे भारतीय किसानों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
आनंद रावत ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सूचना का अधिकार, मनरेगा और मध्याह्न भोजन जैसी योजनाओं के माध्यम से आम आदमी को सशक्त किया, जबकि वर्तमान शासन में 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के “अबकी बार मोदी सरकार” और “400 पार” जैसे नारों से देश को कोई ठोस लाभ नहीं हुआ। जनता अब समझ रही है कि चुनावी नारों से ज्यादा जरूरी ठोस नीतियां और जनहित के फैसले हैं।
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