@शब्द दूत ब्यूरो(24 जनवरी 2026)
उत्तराखंड की राजनीति इन दिनों एक अप्रत्याशित भूचाल से गुजर रही है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस बार यह उथल-पुथल विपक्ष की ओर से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के भीतर से ही उठी है। पार्टी के ही कुछ नेताओं के बयानों और गतिविधियों ने भाजपा हाईकमान को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है, जिससे देहरादून से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में सरगर्मियां तेज हो गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडे का नाम सामने आ रहा है। उनके हालिया बयानों और रुख ने न सिर्फ प्रदेश नेतृत्व को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो मामला अब केवल प्रदेश स्तर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुका है, जहां स्थिति पर गंभीरता से मंथन किया जा रहा है।
दिलचस्प यह है कि जिस मुद्दे पर भाजपा के भीतर खलबली मची हुई है, उस पर विपक्षी दल पूरी तरह शांत नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष फिलहाल “वेट एंड वॉच” की रणनीति अपनाए हुए है और भाजपा के आंतरिक मतभेदों को खुद ही गहराने देने के मूड में है। विपक्ष का यह मौन ही इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक गंभीर बनाता है।
भाजपा के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि पार्टी अनुशासन और संगठनात्मक एकता को अपनी सबसे बड़ी ताकत बताती रही है। ऐसे में जब पार्टी के ही नेता सार्वजनिक मंचों पर असंतोष जाहिर कर रहे हों, तो यह संदेश दूर तक जाता है। यही वजह है कि हाईकमान स्तर पर इस मामले को लेकर मंथन तेज है और आने वाले दिनों में सख्त निर्णय या संगठनात्मक कदम उठाए जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं।
कुल मिलाकर उत्तराखंड की राजनीति में यह भूचाल फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा। सवाल यही है कि भाजपा इस आंतरिक चुनौती को कैसे संभालती है और क्या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात पर नियंत्रण पा सकेगा, या फिर यह सियासी हलचल आने वाले दिनों में और तेज होगी। प्रदेश की राजनीति अब इसी जवाब की प्रतीक्षा कर रही है।
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