@शब्द दूत ब्यूरो (20 जनवरी 2026)
देहरादून। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के एक वर्ष के भीतर इसके प्रभावी और सुरक्षित क्रियान्वयन ने निजता उल्लंघन को लेकर जताई जा रही तमाम आशंकाओं को पूरी तरह निर्मूल साबित कर दिया है। बीते एक साल में यूसीसी के तहत विभिन्न सेवाओं के लिए पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन इस दौरान निजता उल्लंघन की एक भी शिकायत सामने नहीं आई। यह उपलब्धि प्रदेश में लागू यूसीसी के मजबूत सुरक्षा तंत्र और पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
यूसीसी के अंतर्गत लगभग शत प्रतिशत आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जा रहे हैं। इस फेसलेस प्रक्रिया के कारण आवेदकों को किसी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ती। नागरिक घर बैठे ही विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन संबंध पंजीकरण और लिव-इन संबंध समाप्ति जैसी सेवाओं के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे न केवल समय की बचत हो रही है, बल्कि पहचान सार्वजनिक होने या व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की आशंका भी समाप्त हो गई है।
पोर्टल पर नागरिकों की निजी जानकारियों को सुरक्षित और गोपनीय रखने के लिए सख्त तकनीकी सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं। खास बात यह है कि आवेदन एक बार सक्षम स्तर से स्वीकृत हो जाने के बाद संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी नहीं देख सकता। आवेदन के साथ प्रस्तुत विवरण तक केवल आवेदक की ही सीमित पहुंच रहती है, वह भी निर्धारित वैरिफिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से। इसी मजबूत व्यवस्था के कारण एक वर्ष में निजता उल्लंघन का कोई मामला सामने नहीं आया।
औसतन पांच दिनों के भीतर प्रमाणपत्र उपलब्ध हो जाने से आम नागरिकों को त्वरित सेवाएं मिल रही हैं, जिससे शासन की कार्यकुशलता भी स्पष्ट होती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर शुरुआत में कुछ लोगों ने नकारात्मक माहौल बनाने का प्रयास किया था, लेकिन बीते एक साल के सफल क्रियान्वयन ने उन सभी आशंकाओं का जवाब दे दिया है। उन्होंने कहा कि यूसीसी नागरिकों की निजता की शत प्रतिशत सुरक्षा सुनिश्चित करने में सफल रही है और पूरे प्रदेश में सरल, पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए इसका संचालन गुड गवर्नेंस का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है।
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