@शब्द दूत ब्यूरो (15 जनवरी 2026)
रुद्रप्रयाग। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर अगस्त्य ऋषि मुनि महाराज की चल-विग्रह पालकी (देव डोली) 15 वर्षों के बाद अगस्त्यमुनि क्षेत्र भ्रमण पर निकली थी, लेकिन रास्ते में बने गेट के कारण आगे नहीं बढ़ सकी और वापस अपने मंदिर की ओर लौट गई। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार यह अशुभ संकेत माना जा रहा है।
पालकी जब मुख्य हाइवे पर स्थित उस गेट तक पहुँची, जिसे प्रशासन से हटाने का आग्रह किया गया था, तो वह आगे नहीं जा पाई। इस वजह से हाइवे पर तीन-चार किलोमीटर तक वाहन जाम लग गया और यात्री तथा श्रद्धालु घंटों थमे रहे। पुलिस को वैकल्पिक मार्गों से वाहनों को डायवर्ट करना पड़ा।
स्थानीय कहते हैं कि गेट न हटने से देव डोली की नाराजगी का संकेत मिलता है और प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों को इस पर संज्ञान लेने की चेतावनी दी गई है। कई ग्रामीणों ने भी इसे शुभ नहीं माना और विवाद के चलते पालकी को उसी मार्ग से वापस लाना पड़ा।
यह आयोजन क्षेत्रवासियों और भक्तों के लिए खास धार्मिक महत्व रखता था, किन्तु गेट को न हटाए जाने से यात्रा में विघ्न उत्पन्न हुआ और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठे हैं।
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