@शब्द दूत ब्यूरो (02 जनवरी 2026)
काशीपुर। मुरादाबाद रोड स्थित हथकरघा ऑफिस के सामने शक्ति फार्म निवासी अनादि मांझी टेराकोटा से निर्मित आकर्षक हस्तनिर्मित मूर्तियां बेचकर अपनी पारंपरिक कला को जीवित रखे हुए हैं। यह सभी मूर्तियां अनादि मांझी और उनके पिता परिमल मांझी अपने हाथों से तैयार करते हैं। पूरी तरह से हैंडमेड यह कलाकृतियां न केवल स्थानीय लोगों को आकर्षित कर रही हैं, बल्कि होम डेकोर के शौकीनों की पहली पसंद भी बनती जा रही हैं।
अनादि मांझी बताते हैं कि उनके पिता परिमल मांझी एक अनुभवी कलाकार हैं, जिन्हें इस कला में लगभग 40 से 45 वर्षों का अनुभव है। यह कार्य उनके पिता से ही शुरू हुआ, जिसे अब अनादि और उनके दो भाई मिलकर आगे बढ़ा रहे हैं। शक्ति फार्म, उधम सिंह नगर स्थित उनकी कार्यशाला में चिकनी मिट्टी से टेराकोटा मूर्तियों का निर्माण किया जाता है।
मूर्तियों की बारीकी और डिजाइन के अनुसार उन्हें तैयार करने में समय लगता है। सामान्य मूर्तियों में दो से तीन दिन, जबकि विशेष और जटिल डिजाइनों वाली मूर्तियों को तैयार करने में चार से पांच दिन तक का समय लग जाता है।
अनादि के अनुसार, यदि अच्छे प्लेटफॉर्म और प्रचार-प्रसार मिले तो बिक्री से लागत निकल जाती है और अच्छा रिस्पॉन्स भी मिलता है।
करीब 10 वर्षों से मुरादाबाद रोड पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रहे मांझी परिवार का कहना है कि हस्तशिल्प के प्रति लोगों का क्रेज लगातार बढ़ रहा है। हर साल नए डिजाइन लाकर वे ग्राहकों की पसंद के अनुसार बदलाव करते हैं। यह कार्य उनके परिवार के लिए रोजगार का एकमात्र साधन है।
गौरतलब है कि परिमल मांझी को उत्तराखंड राज्य सरकार द्वारा स्टेट अवार्ड और जिला पुरस्कार भी मिल चुका है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2014-15 में प्रदान किया गया था। अनादि मांझी बताते हैं कि सरकार की ओर से गांधी शिल्प बाजार, हैंडीक्राफ्ट एग्जीबिशन और डीआईसी के माध्यम से लगने वाले सरकारी कार्यक्रमों जैसे प्लेटफॉर्म से उन्हें अपनी कला को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मांझी परिवार की टेराकोटा कला काशीपुर की पहचान बनती जा रही है और ऐसे कारीगरों को निरंतर प्रोत्साहन मिलना चाहिए, ताकि पारंपरिक हस्तशिल्प आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रह सके।
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