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वर्ष 2026 : सुशासन, विकास और आत्मनिर्भर उत्तराखंड की दिशा में धामी सरकार का परिणामोन्मुख एजेंडा

@शब्द दूत ब्यूरो (01 जनवरी 2026)

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में वर्ष 2026 उत्तराखंड के लिए विकास, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक वर्ष के रूप में उभरने जा रहा है। ऐतिहासिक नीतिगत फैसलों के बाद अब राज्य सरकार का फोकस योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, जमीनी बदलाव और आम नागरिक की आय व जीवन स्तर में ठोस सुधार पर केंद्रित रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में तैयार वर्ष 2026 की कार्ययोजना सुशासन, समावेशी विकास, आर्थिक आत्मनिर्भरता, कृषि–उद्यानिकी सशक्तिकरण, पर्यटन विस्तार और पर्यावरण संतुलन के इर्द-गिर्द केंद्रित है।

सरकार का प्राथमिक लक्ष्य शासन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-आधारित बनाना है। ई-गवर्नेंस को सभी विभागों में अनिवार्य रूप से लागू करते हुए डिजिटल फाइल सिस्टम, ऑनलाइन सेवाओं और समयबद्ध डिलीवरी को सशक्त किया जाएगा। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत जन शिकायतों का त्वरित निस्तारण और सेवाओं की तय समय-सीमा में उपलब्धता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी को मजबूती देना वर्ष 2026 के एजेंडे का अहम स्तंभ रहेगा। चारधाम ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल परियोजना, हेली सेवाओं के विस्तार और सीमावर्ती क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कों के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य, शिक्षा और आपात सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित हो सके।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए धामी सरकार ने कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी को आय बढ़ाने का मुख्य माध्यम बनाया है। वर्ष 2026 में पॉलीहाउस खेती, कीवी उत्पादन, हाई वैल्यू फसलों तथा सेब–कीवी नीति को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में पॉलीहाउस आधारित खेती को बढ़ावा देकर किसानों को वर्षभर सब्ज़ी, फूल और उच्च गुणवत्ता वाली फसलें उगाने के अवसर मिलेंगे। इसके लिए अनुदान, तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। कीवी नीति के तहत उत्तराखंड को देश का प्रमुख कीवी उत्पादक राज्य बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिससे कम भूमि में अधिक आय और निर्यात की संभावनाओं के जरिए किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही सेब, नाशपाती, अखरोट और अन्य पहाड़ी फलों की वैल्यू चेन विकसित की जाएगी, ताकि पलायन रुके और गांवों में ही रोजगार के अवसर सृजित हों।

पर्यटन को राज्य के आर्थिक इंजन के रूप में विकसित करना भी सरकार की प्रमुख रणनीति में शामिल है। चारधाम यात्रा को सुरक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के साथ-साथ विंटर टूरिज्म, साहसिक पर्यटन, ईको-टूरिज्म और होमस्टे योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा। स्थानीय युवाओं और महिलाओं की भागीदारी से पर्यटन आधारित रोजगार सृजन पर विशेष जोर रहेगा।

रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में वर्ष 2026 में सरकारी भर्तियों को पूरी तरह पारदर्शी, समयबद्ध और नकलमुक्त बनाए रखने का संकल्प दोहराया गया है। निजी क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए स्टार्टअप, आईटी पार्क, उद्योग और निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा। युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, तकनीकी प्रशिक्षण और स्वरोजगार योजनाओं का विस्तार किया जाएगा।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार सरकार की अहम प्राथमिकताओं में हैं। समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ महिला सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। स्वयं सहायता समूहों, लखपति दीदी योजना और महिला उद्यमिता को प्रोत्साहित कर महिलाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा।

इसके साथ ही हिमालयी पारिस्थितिकी के संरक्षण, नदियों और जल स्रोतों के पुनर्जीवन, वनों की सुरक्षा और आपदा पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने पर भी सरकार का विशेष फोकस रहेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्ष 2026 “नीतियों से परिणाम” का वर्ष होगा। उद्यानिकी, पॉलीहाउस और कीवी जैसी उच्च आय वाली योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हुए सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संतुलित विकास वाला राज्य बनाना है, जहां विकास और प्रकृति साथ-साथ आगे बढ़ें और हर नागरिक को समान अवसर मिलें।

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