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उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त होने के बाद अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के गठन की तैयारी तेज, अल्पसंख्यक समुदाय के बुद्धिजीवियों की तलाश

@शब्द दूत ब्यूरो (30 दिसंबर 2025)

देहरादून। उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को समाप्त करने के निर्णय के बाद धामी सरकार ने अल्पसंख्यक शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की तैयारी तेज कर दी है। मदरसा बोर्ड के स्थान पर अब उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया जाएगा, जिसके अंतर्गत मदरसा संचालकों सहित सभी अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता लेनी होगी और उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्धता प्राप्त करनी अनिवार्य होगी।

राजभवन से इस फैसले को स्वीकृति मिलने के बाद राज्य सरकार ने अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े बुद्धिजीवियों की तलाश शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार प्रस्तावित शिक्षा प्राधिकरण में मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो मिलकर अल्पसंख्यक बच्चों के लिए पाठ्यक्रम तैयार करेंगे।

उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक–2025 को गैरसैंण में आयोजित मानसून सत्र के दौरान विधानसभा से पारित किया गया था, जिसके बाद इसे मंजूरी के लिए राजभवन भेजा गया। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि.) गुरमीत सिंह ने अल्पसंख्यक प्रतिनिधि मंडलों से व्यापक चर्चा के बाद इस विधेयक पर हस्ताक्षर कर स्वीकृति प्रदान की। इन बैठकों में मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध सहित विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल रहे।

विधेयक के प्रावधानों के तहत राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों की शिक्षा के लिए एक केंद्रीय प्राधिकरण (Authority) का गठन किया जाएगा, जो अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता देगा। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि मदरसे जैसे संस्थान अब उत्तराखंड शिक्षा बोर्ड से संबद्ध होकर राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षा प्रदान करें।

इस संबंध में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड में सभी अल्पसंख्यक बच्चे जुलाई 2026 सत्र से एक समान शिक्षा प्रणाली के तहत पढ़ाई करेंगे। उन्होंने कहा कि मदरसा बोर्ड समाप्त होगा और मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध व जैन शिक्षण संस्थान उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अंब्रेला के अंतर्गत आएंगे। मुख्यमंत्री ने इसे देवभूमि में तुष्टिकरण आधारित शैक्षिक नीति के अंत की शुरुआत बताते हुए कहा कि सभी अल्पसंख्यक बच्चों को राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से जोड़ा जाएगा।

सरकार के इस फैसले को राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने का रास्ता साफ होगा।

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