यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन का उदाहरण भी है। जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि जब कुछ पुलिसकर्मियों में इतनी “शक्ति” है कि वे थाने में किसी को अपाहिज बना दें, तो सरकार उन्हें सीमा पर तैनात क्यों नहीं कर देती?
@शब्द दूत ब्यूरो (23 दिसंबर 2025)
आगरा। किरावली थाना क्षेत्र से पुलिसिया बर्बरता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। गांव करहरा में सेवानिवृत्त फौजी बलवीर सिंह की हत्या के खुलासे के नाम पर पुलिस ने एक निर्दोष किसान पर अमानवीय अत्याचार किया। किसान को थाने बुलाकर उल्टा लटकाया गया और बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसके दोनों पैर टूट गए। मामला उजागर होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। कार्रवाई करते हुए एसीपी अछनेरा को हटा दिया गया है, जबकि थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, पांच अगस्त को करहरा गांव में सेवानिवृत्त फौजी बलवीर सिंह की हत्या हुई थी। चार महीने बीतने के बाद भी पुलिस हत्याकांड का खुलासा नहीं कर सकी। इसी दबाव में पुलिस ने गांव के किसान राजू (42) को शक के आधार पर रविवार शाम थाने बुलाया। परिजनों का आरोप है कि रात करीब आठ बजे एसआई धर्मवीर और सिपाही रवि मलिक उसे थाने की छत पर ले गए, उल्टा लटकाया और पैरों पर डंडे बरसाए। पुलिसकर्मी हत्यारोपी का नाम बताने का दबाव बना रहे थे।
मारपीट के दौरान राजू बेहोश हो गया। घबराए पुलिसकर्मी उसे थाने के पिछले दरवाजे से गाड़ी में डालकर किरावली अस्पताल ले गए। इस दौरान परिजनों को न तो मिलने दिया गया और न ही सही जानकारी दी गई। सोमवार को जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो राजू ने आपबीती सुनाई। डॉक्टरों की रिपोर्ट में उसके दोनों पैरों में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई।
मामले की जानकारी मिलने पर केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने पुलिस आयुक्त से बातचीत की। इसके बाद डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा स्वयं अस्पताल पहुंचे और जांच की। पुलिसकर्मियों द्वारा गुमराह किए जाने की बात भी सामने आई। पहले मामूली चोट बताई गई, लेकिन एक्स-रे रिपोर्ट में गंभीर फ्रैक्चर निकले।
डीसीपी पश्चिमी जोन अतुल शर्मा ने बताया कि किरावली थाना प्रभारी नीरज सिंह, एसआई धर्मवीर और सिपाही रवि मलिक को निलंबित कर उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। वहीं एसीपी अछनेरा रामप्रवेश गुप्ता को पद से हटाकर एसीपी ट्रैफिक बनाया गया है। नए थाना प्रभारी के रूप में यूपी 112 के प्रभारी सत्यवीर को तैनात किया गया है।
यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन का उदाहरण भी है। जनता के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि जब कुछ पुलिसकर्मियों में इतनी “शक्ति” है कि वे थाने में किसी को अपाहिज बना दें, तो सरकार उन्हें सीमा पर तैनात क्यों नहीं कर देती?
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