@शब्द दूत ब्यूरो (26 जुलाई 2025)
देहरादून। टिहरी बांध परियोजना के विस्थापितों को पुनर्वास के तहत आवंटित आवासीय भूखण्डों में हुए व्यापक भ्रष्टाचार और भूमि घोटालों की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल को जन दर्शन कार्यक्रम के दौरान प्राप्त शिकायतों ने पूरे आवंटन तंत्र को कठघरे में ला खड़ा किया है। लगातार सामने आ रहे लैण्डफ्रॉड के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी सविन बंसल ने सचिव सिंचाई, उत्तराखण्ड शासन को इन प्रकरणों की जांच हेतु सीबीसीआईडी या विजिलेंस से विशेष जांच कराने की संस्तुति प्रेषित की है।
जिलाधिकारी सविन बंसल ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन ऐसे घोटालों पर पारदर्शिता और निष्पक्षता से कार्रवाई करते हुए दोषियों को जेल भेजने की हर संभव पहल करेगा। इसी क्रम में अधीक्षण अभियंता (टिहरी बांध पुनर्वास) का वाहन भी प्रशासन ने जब्त कर लिया है।
जन दर्शन कार्यक्रम में पुलमा देवी, निवासी शास्त्रीपुरम, तपोवन एन्क्लेव, रायपुर रोड, देहरादून द्वारा प्रस्तुत प्रकरण ने प्रशासन को सकते में डाल दिया। वर्ष 2007 में खरीदी गई भूमि, जिसका दाखिल-खारिज उनके नाम हो चुका था, पर एक अन्य महिला द्वारा अवैध कब्जा कर लिया गया। जांच में सामने आया कि एक ही भूखण्ड को दो अलग-अलग लोगों को दो बार आवंटित कर भूमिधरी की प्रक्रिया अपनाई गई थी। विभागीय लापरवाही और दोहरा आवंटन इस मामले को स्पष्ट लैण्डफ्रॉड की श्रेणी में ले जाता है।
इसी तरह सुमेर चन्द, हेमन्त कुमार और शैलेन्द्र कुमार द्वारा ग्राम अटकफार्म में भूखण्ड आवंटन को लेकर की गई शिकायत में भी गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। मौके पर जांच में पाया गया कि जिन भूखण्डों पर आवंटन हुआ था, वहां कब्जा किसी और का है। वहीं, अजय चौहान द्वारा की गई शिकायत में यह स्पष्ट हुआ कि अजबपुर कलां में एक ही भूखण्ड बी-205 को पहले इरशाद अहमद को और फिर फतरू को दोबारा आवंटित कर दिया गया। यह आवंटन 2001 और 2005 में दोहराया गया, जिसे अंततः 2024 में निरस्त करना पड़ा।
इन सभी मामलों में जिला प्रशासन ने यह पाया कि पुनर्वास विभाग द्वारा टिहरी बांध परियोजना के तहत की गई भूखण्ड आवंटन प्रक्रिया में गंभीर स्तर पर अनियमितताएं हैं। शासन को भेजी गई रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि यह सुनियोजित षड्यंत्र प्रतीत होता है, जिसमें संबंधित अधिकारियों की संलिप्तता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में प्रशासन ने इन सभी मामलों की विशेष गहन जांच के लिए सीबीसीआईडी अथवा विजिलेंस एजेंसी से जांच कराने की संस्तुति की है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन का उद्देश्य केवल दोषियों को दंडित करना नहीं, बल्कि विस्थापितों को उनका वैधानिक अधिकार और न्याय दिलाना भी है। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या एजेंसी अगर इस भूमि आवंटन घोटाले में संलिप्त पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। इस कदम से न केवल वर्तमान पीड़ितों को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में ऐसे प्रकरणों की पुनरावृत्ति भी रोकी जा सकेगी।
जिला प्रशासन अब पुनर्वास विभाग की पूरी प्रणाली की समीक्षा करने की भी तैयारी में है। बार-बार भू-आवंटन में दोहराव, कब्जा विवाद, अभिलेखीय गड़बड़ियां और प्रशासनिक लापरवाही यह संकेत देती है कि पूरे आवंटन ढांचे में सुधार की आवश्यकता है। टिहरी बांध विस्थापितों की पीड़ा अब सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि हकीकत में सुनी जा रही है। जिला प्रशासन की इस सक्रियता ने पुनर्वास घोटाले के दोषियों को सतर्क कर दिया है और पीड़ितों में न्याय की उम्मीद जगा दी है। अब देखना यह है कि शासन कब तक जांच एजेंसियों को हरी झंडी देता है और कार्रवाई का पहिया आगे बढ़ता है।
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