@शब्द दूत ब्यूरो (16 जुलाई 2025)
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गली-मोहल्लों में आवारा कुत्तों को खाना खिलाने की प्रवृत्ति पर सख़्त नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जानवरों का संरक्षण ज़रूरी है, लेकिन इससे आम नागरिकों को होने वाली परेशानियों को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
पीठ ने एक याचिकाकर्ता से तीखे अंदाज़ में पूछा – “गली छोड़ घर में क्यों नहीं खिलाते?” यह टिप्पणी उस याचिका पर सुनवाई के दौरान आई, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सार्वजनिक स्थलों पर कुत्तों को खाना देने पर रोक लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोगों को अपने घर में ही कुत्तों के लिए आश्रय बनाना चाहिए और वहीं उन्हें भोजन देना चाहिए, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर रहने वाले लोगों को खतरे या असुविधा का सामना न करना पड़े।
कोर्ट की यह सख़्ती ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्सों से आवारा कुत्तों के हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पशु अधिकारों की आड़ में नागरिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख को नागरिक सुरक्षा और सामाजिक संतुलन की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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