@विनोद भगत
हमारे एक परम मित्र हैं—नाम बताना उचित नहीं, पर अंदाज़ा आप खुद लगा लीजिएगा। पिछले दिनों मुलाक़ात हुई तो देखा कि उनकी सेकंड हैंड कार के आगे नई चमचमाती प्लेट लगी है। नंबर प्लेट के ठीक ऊपर मोटे अक्षरों में लिखा था—भावी मुख्यमंत्री। पहले तो हम सोचने लगे कि ये कार मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलवाने राजभवन जा रही है या सीधा विधानसभा परिसर में पार्क होने वाली है।
थोड़ी हिम्मत जुटाकर हमने पूछा—“भाई, ये क्या तमाशा है? ऐसे कैसे कोई ‘भावी मुख्यमंत्री’ लिखवा सकता है? कहीं पुलिस पकड़ ले गई तो?” मित्र मुस्कुराए जैसे महंगाई पर भाषण दे रहे हों और बोले—“भाई साहब, यही तो कला है। लिखवाया है भावी, मुख्यमंत्री नहीं। भावी तो मैं कुछ भी हो सकता हूँ। तुम भी हो सकते हो, वो भी हो सकता है। कानून भावी के सपनों को नहीं रोक सकता। वो तो पूर्व वाले पर आपत्ति करता है।”
हम चुप। हमारी सारी संविधान ज्ञान की हवा निकल गई। हमने दुबारा पूछा—“लेकिन कोई ये पढ़कर मान ले कि तुम सचमुच मुख्यमंत्री बनने वाले हो और फिर…?”
वो बोले—“तो क्या बुरा है? लोकतंत्र है, सपने देखने का अधिकार है। मैं आज भावी मुख्यमंत्री हूँ, कल भावी प्रधानमंत्री हो सकता हूँ, परसों भावी अंतरिक्ष यात्री। क्या पता कोई खाली रॉकेट मिल जाए।”
हमने बात काटी—“मगर भावी प्रधानमंत्री तो सुनने में भारी-भरकम लगता है, लोग हँसेंगे।”
वो बोले—“तभी तो ‘भावी मुख्यमंत्री’ लिखा है। ज़मीन से जुड़ा सपना है, जमीनी राजनीति का पोस्टर हूँ मैं।”
अब आप ही सोचिए, जब किसी का ‘भावी’ कह देने से देश नहीं हिलता तो कार क्यों हिलेगी? हमने टोका—“कहीं ट्रैफिक पुलिस ने पूछ लिया कि आप मुख्यमंत्री कैसे हैं?”
वो बोले—“तो कह दूँगा अभी नहीं हूँ, भावी हूँ। वो भी समझदार होंगे। वैसे भी आजकल पुलिसवाले हर ‘भावी’ को गंभीरता से लेते हैं, क्योंकि कब कौन ‘भावी’ से ‘वर्तमान’ बन जाए, कह नहीं सकते।”
हमने पूछा—“अगर कोई पूछे कि आपने ये लिखवाया किस दम पर है?”
मित्र बोले—“दम तो दमड़ी भर का भी नहीं है, मगर इरादा बड़ा है। और वैसे भी इस देश में जो कुछ नहीं करता, वही सब कुछ बन जाता है। मैं तो बस संभावनाओं को सजाकर चला रहा हूँ।”
अब बताइए, जब आदमी ‘भावी’ होकर घूम सकता है, तो आप और हम क्यों नहीं? आप भी अपनी साइकिल पर ‘भावी मंत्री’, ‘भावी विधायक’ या ‘भावी राष्ट्रपति’ लिखवा लीजिए। हो सकता है अगला चुनाव जीतने से पहले ही लोग आपके पाँव छूने लगें।
वैसे सोचिए ज़रा—अगर एक प्लेट से इतना आत्मविश्वास आता है, तो नंबर प्लेट की जगह भविष्य लिखवा लेना चाहिए। “भावी नोबेल विजेता”, “भावी मेटा मालिक”, “भावी यूनिवर्सिटी फाउंडर”, और अगर ज़्यादा ही फुर्सत है तो “भावी भगवान” तक भी ट्राय किया जा सकता है।
आख़िर लोकतंत्र है साहब, यहाँ हर कोई भावी है, चाहे वर्तमान में खाली ही क्यों न हो!
ये एक व्यंग मात्र है आज के हालात पर।

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