देश में लगातार बढ़ती टोल–सड़क संबंधित असहमति के बीच, शेंटो का यह शांतिपूर्ण विरोध नया आयाम जोड़ता है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर अपडेट साझा किए, और अंततः प्लाजा प्रशासन को बाध्य कर दिया कि वे बिना भुगतान के उनके वाहन को जाने दें ।
@शब्द दूत ब्यूरो (10 जुलाई 2025)
पालक्कड़ (केरल) – केरल के एक युवक शेंटो ने खराब राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति के विरोध में पनिय्यणकरा टोल प्लाजा के एक लेन को लगभग 9.5 घंटे तक ब्लॉक रख दिया, और टोल न चुकाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया।
शेंटो फास्टैग रिचार्ज नहीं कर रहे थे, क्योंकि निर्माणाधीन और गड्ढों से भरी सड़क पर उन्हें सेवा नहीं मिल रही थी । उन्होंने बताया कि उनकी बहन गर्भवती हैं और इस टूटी सड़क की वजह से उन्हें भारी परेशानी झेलनी पड़ी है । टोल कर्मचारियों ने कई बार उनसे कहा कि सिर्फ ₹50 देकर निकल जाएं, लेकिन उन्होंने आवाज़ न उठाते हुए यथास्थिति पर ध्यान दिलाया ।
देश में लगातार बढ़ती टोल–सड़क संबंधित असहमति के बीच, शेंटो का यह शांतिपूर्ण विरोध नया आयाम जोड़ता है। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर अपडेट साझा किए, और अंततः प्लाजा प्रशासन को बाध्य कर दिया कि वे बिना भुगतान के उनके वाहन को जाने दें ।
इस घटना को लेकर चर्चा छिड़ गई है कि क्या कुछ सड़कें पूरी तरह सुरक्षित और यात्रा–योग्य नहीं होने पर टोल वसूली रोकी जानी चाहिए। क्योंकि इसी तरह की व्यवस्था को लेकर हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने भी सवाल उठाए थे – यदि एन एच ए आई सुचारु और सुरक्षित सेवा नहीं दे पाया, तो टोल वसूली क्यों जारी? ।
शांतिपूर्ण और गैर‑आक्रामक रूप से आयोजित शेंटो का यह विरोध लगातार ऑनलाइन समर्थन पा रहा है, और यह राष्ट्रीय स्तर पर टोल सिस्टम और सड़क–विन्यास के गुणात्मक मानकों पर पुनर्विचार की मांग को तेज कर रहा है ।
प्रशासन को बिना भुगतान छोड़ने पर मजबूर किया, सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू, टोल वसूली की वैधता पर सवाल। आपको बता दें कि हाल ही में केरल हाईकोर्ट का भी यह मानना था कि यदि सड़क सुरक्षित नहीं है तो टोल वसूली वाजिब नहीं।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इस अनूठी पहल ने सम्पूर्ण देश में टोल वसूली प्रणाली और उसकी जवाबदेही पर नया बहस–मंच तैयार किया है।
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