@शब्द दूत ब्यूरो (06 जुलाई 2025)
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने बीते रोज नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान देश में बढ़ती गरीबी और धन के असमान बंटवारे की बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे गरीबों की संख्या बढ़ रही है और संपत्ति कुछ अमीरों के पास सिमटती जा रही है, जो एक खतरनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि समाज में धन का विकेंद्रीकरण होना चाहिए। ऐसा नहीं होना चाहिए कि सारी संपत्ति कुछ लोगों के पास केंद्रित हो जाए। हमें ऐसी अर्थव्यवस्था की दिशा में काम करना होगा जो रोजगार पैदा करे और गांवों का विकास करे। अपने संबोधन के दौरान गडकरी ने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और डॉ. मनमोहन सिंह की उदार आर्थिक नीतियों की सराहना की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बिना नियंत्रण के केंद्रीयकरण से सावधान रहने की जरूरत है। साथ ही स्वामी विवेकानंद को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा कि जिसका पेट खाली हो, उसे दर्शन नहीं सिखाया जा सकता। उन्होंने यह टिप्पणी सामाजिक असमानता और आर्थिक विषमता के मुद्दे पर चर्चा के दौरान की।
गडकरी ने कहा कि देश की आर्थिक प्रगति के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है कि आम जनता तक उसका लाभ पहुंचे। उन्होंने यह भी जोड़ा कि केवल विकास के आँकड़ों से देश का भला नहीं होगा, जब तक समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को उसका अधिकार और अवसर नहीं मिलेगा।
इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया। गडकरी ने कहा कि केवल इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण या GDP की दर बढ़ाना ही विकास नहीं है, बल्कि समाज के कमजोर वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ना ही असली प्रगति है।
केंद्रीय मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक असमानता को लेकर लगातार बहस हो रही है। उनके इस वक्तव्य को कई विश्लेषक एक महत्वपूर्ण आत्ममंथन के रूप में देख रहे हैं।
गडकरी ने नीति निर्माताओं से अपील की कि वे ऐसी योजनाएं बनाएं, जिनका वास्तविक लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और आर्थिक संतुलन के बिना देश का समावेशी विकास संभव नहीं है।
उनका यह बयान राजनीतिक हलकों और नीति निर्माताओं के बीच नई बहस को जन्म दे सकता है।
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