@शब्द दूत ब्यूरो (12 जुलाई 2024)
राष्ट्रपति भवन में 5 जुलाई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 10 जवानों को उनके शौर्य के लिए कीर्ति चक्र से सम्मानित किया। 7 जवानों को मरणोपरांत सम्मान मिला। एक शहीद कैप्टन अंशुमन सिंह को भी मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया। और ये कीर्ति चक्र शहीद अंशुमन सिंह और उनकी मां मंजू सिंह ने ग्रहण किया था।
शहादत के बाद मिले इस प्रतिष्ठित सम्मान के बाद शहीद के घर में कुछ ऐसा हुआ कि लोग भी हैरत में पड़ गये हैं। शहीद के पिता रवि प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि, ‘बहू कीर्ति चक्र लेकर यहां से चली गई है। अपना एड्रेस भी चेंज करवा लिया है। हमारे पास कीर्ति चक्र की कोई रिसीविंग भी नहीं है। उसे भी बहू ले गई।’
वहीं, मां ने कहा कि बहुएं भाग जाती हैं। मेरे जैसा दुख किसी को न हो। सेना में निकटतम परिजन (एनओके) का जो निर्धारित मापदंड है वह ठीक नहीं है। परिभाषा में अविवाहित के लिए माता-पिता होते हैं और विवाहित के लिए जीवनसाथी। शहीद को दी जाने आर्थिक मदद निकटतम परिजन को ही दी जाती है। शहीद के पिता ने कहा कि बेटे की पांच महीने की शादी थी, कोई बच्चा नहीं है। दीवार पर लगी तस्वीर की ओर इशारा करते हुए बोले कि आज हमारे पास बस यही बचा है।
शहीद अंशुमन के पिता ने कहा कि निकटतम परिजन की परिभाषा के बारे में सवाल पूछे जाने चाहिए। इसमें बदलाव होना चाहिए। शहीद की पत्नी परिवार में रहेगी तो क्या होगा? नहीं रहने पर क्या होगा? बच्चे रहेंगे तो क्या होगा? माता-पिता का क्या होगा? कितने लोग परिवार के लोग उस पर निर्भर थे और वह कितनी जिम्मेदारी छोड़कर गया है? उन चीजों पर संशोधन हो। हमने इस बारे में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से बात की है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से बात करेंगे।
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