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न अदालत से फैसला न बीजेपी से टिकट कन्फर्म फिर भी क्यों फुल कॉन्फिडेंट हैं बृजभूषण शरण सिंह

@शब्द दूत ब्यूरो (18 अप्रैल 2024)

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपनी बिसात पूरी तरह बिछा दी है लेकिनसबसे ज्यादा निगाहें पार्टी के बहुचर्चित सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर लगी हैं. महिला पहलवानों के यौन शोषण के आरोपों के मामले में न ही फैसला आ रहा है और न ही लोकसभा चुनाव का टिकट कन्फर्म हो रहा है. इस हिसाब से कह सकते हैं कि बृजभूषण शरण सिंह का राजनीतिक करियर अभी दांव पर है इसके बावजूद उनके अभियान पर कोई असर नहीं देखा जा रहा है. कैसरगंज लोकसभा सीट से बृजभूषण सिंह को टिकट मिलेगा या नहीं, इससे बेपरवाह बृजभूषण सिंह फुल कॉन्फिडेंस में हैं. देखा तो ये भी जा रहा है कि उन्होंने चुनावी तैयारी शुरू कर दी है. गाड़ियों के लंबे चौड़े काफिले के साथ क्षेत्र में प्रचार देखे जा रहे हैं.

कैसरगंज सीट पर आखिरकार क्यों सस्पेंस बना हुआ है, ये बड़ा सवाल है. ये हाल तब है जब कैसरगंज और रायबरेली लोकसभा सीट के लिए नामांकन की तारीख नजदीक आती जा रही है. यहां 20 मई को मतदान होने वाला है और इस सीट पर नामांकन भरने की प्रक्रिया 26 अप्रैल से 6 मई के बीच संपन्न होने वाली है. यूपी में तमाम सीटों पर बीजेपी उम्मीदवारों की दस सूची जारी हो चुकी है, लेकिन कैसरगंज से कैंडिडेट घोषित नहीं किया गया है. दूसरी तरफ बिना नाम घोषित हुए बृजभूषण शरण सिंह मैदान-ए-कैसरगंज में अभियान चला रहे हैं. क्या उन्हें इस बात का भरोसा है कि टिकट तो अंतत: उन्हीं के पाले में आना है.

होइहै वहि जो राम रचि राखा का मतलब

हालांकि बिना अनुमति अपने लोकसभा क्षेत्र में दर्जनों वाहनों के काफिले के साथ घूमने के चलते बृजभूषण शरण सिंह को नोटिस भी मिल चुकी है, लेकिन उनकी सक्रियता बरकरार है और उनके दबदबे को चुनौती देने वाला भी कोई सामने नहीं आ सका है. बृजभूषण शरण सिंह को कैसरगंज से बीजेपी टिकट देगी या नहीं- ये भी अभी भविष्य के गर्त में है और इस रहस्य का पर्दा पड़ा हुआ है. बीजेपी के अंदर इस मुद्दे पर आखिर क्या मंथन चल रहा है, ये या तो बीजेपी के आला अधिकारी जानते हैं या फिर खुद बृजभूषण शरण सिंह. शायद यही वजह है कि गुरुवार को दिल्ली में राउज एवेन्यू कोर्ट में जब पत्रकारों ने सवाल पूछा तो बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि होइहै वहि जो राम रचि राखा. यानी होना तो वही है जो ऊपर वाले ने तय कर रखा है.

वैसे एक बात तो साफ है कि कैसरगंज लोकसभा सीट पर उम्मीदवार का तय नहीं होना इत्तेफाक तो बिल्कुल नहीं हो सकता. इसकी वजह को समझने के लिए बृजभूषण शरण सिंह की शख्सियत और उस शख्सियत के दबदबे को समझना जरूरी है. बृजभूषण शरण सिंह का पूरे क्षेत्र में विशेष प्रभाव रहा है. वह एक अपराजित नेता हैं. उन्हें आज तक किसी ने शिकस्त नहीं दी. क्षेत्र में अपने दबदबे को लेकर बयान भी दे चुके हैं, जो वायरल हुआ था. वो बयान था- दबदबा है तो रहेगा भी, क्योंकि ये भगवान का दिया हुआ है.

बृजभूषण सिंह ने राम पर क्यों टाला सवाल?

बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ऐसे नेता हैं जो केवल दबदबे के लिए ही नहीं जाने जाते बल्कि अपनी खरी जुबान के लिए भी प्रसिद्ध हैं. बृजभूषण शरण सिंह कुछ भी कहते हैं, उसका एक खास मतलब होता है. महिला पहलवान जब उनके खिलाफ आंदोलन कर रही थीं, तब भी ना तो उनके चेहरे पर कोई शिकन थी और ना ही कांफिडेंस में कोई कमी दिखाई दे रही थी. प्रेस कांफ्रेंस में कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं जो मीडिया में सुर्खियां बन चुके हैं. अब उन्होंने रामचरित मानस की पंक्ति कही है तो इसका भी अपना खास महत्व समझना चाहिए. राम का मतलब है ऊपर वाला और ये ऊपरवाला आखिर कौन है?

छह बार से सांसद हैं बृजभूषण शरण सिंह

बृजभूषण शरण सिंह कुल बार सांसद रह चुके हैं. पांच बार बीजेपी के टिकट पर जीते हैं जबकि एक बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर. कैसरगंज वो निर्वाचन क्षेत्र है जहां से बृजभूषण शरण सिंह पहली बार लोकसभा का चुनाव जीते थे. उन्होंने सबसे पहला लोकसभा का चुनाव समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीता था. वहीं वो दो बार गोंडा और एक बार बहराइच से लोकसभा का चुनाव जीत चुके हैं. अब क्या सातवीं बार भी वो सांसद बनेंगे? इस पर सभी की नजर लगी है.

बीजेपी ने यूपी की 80 सीटों में से 75 सीटें अपने पास रखी है और 5 सीट सहयोगी दलों को दी हैं. 75 में बीजेपी अभी तक 73 सीटों की घोषणा कर चुकी है जबकि दो सीट बाकी है. ये दोनों सीटें कैसरगंज और रायबरेली है. वैसे एक कयास ये भी है कि बृजभूषण शरण सिंह को अगर टिकट नहीं मिल पाता है तो भी बीजेपी उनके किसी नजदीकी या परिवार के सदस्य को टिकट दे सकती हैं, इस प्रकार यहां उनका दबदबा कायम रहेगा. कान्फिडेंट होने का यही सबसे बड़ा राज माना जा रहा है और इसीलिए वो क्षेत्र में पूरी तरह से सक्रिय हैं.

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