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सियासी बाजी पलटने का दम रखते हैं पोस्टल बैलट, सभी राजनीतिक दलों की नजर डाक मतपत्रों पर

@शब्द दूत ब्यूरो (03 अप्रैल, 2024)

उत्तराखंड जैसे राज्य में पोस्टल बैलेट यानी डाक मतपत्र भी सियासी बाजी पलटने का माद्दा रखते हैं। हर घर फौजी वाले राज्य में लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव, हर बार इन पोस्टल बैलेट ने अपनी ताकत का अहसास कराया है। इस बार लोकसभा चुनाव में प्रदेश में 93,187 सर्विस मतदाता हैं, जिनके लिए ई-पोस्टल बैलेट प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सभी राजनीतिक दलों की नजर इन पर है।

ऐसे बहुत सारे लोग हैं, जिनके लिए चुनाव में वोट डालना संभव नहीं है। इनमें सबसे प्रमुख वे सैनिक हैं, जो देश की सीमा पर तैनात हैं। सैनिक अपने गृहनगर पर जाकर वोट नहीं ही दे पाते। पोस्टल बैलेट की धारणा मुख्यत: इनके लिए ही बनी है। सैनिकों के अलावा वे सरकारी कर्मचारी और पुलिस और अन्य सुरक्षाकर्मी भी होते हैं, चुनाव में ड्यूटी करते हैं। ये लोग भी अपने क्षेत्र में जा कर वोट नहीं दे पाते हैं।

चुनाव आयोग यह पहले ही तय कर लेता है कि किन लोगों को और कितने लोगों को पोस्टल बैलेट देना है। इसके बाद इन्हीं लोगों को कागज में मुद्रित खास मतपत्र भेजा जाता है, जो पोस्टल बैलेट होता है। यह प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिकली ट्रांस्मिटेड पोस्टल बैलेट सिस्टम होती है। इस मतपत्र को प्राप्त करने वाला नागरिक अपने पसंदीदा प्रत्याशी को चुन कर इलेक्ट्रॉनिक या डाक से चुनाव आयोग को लौटा देता है। चुनाव आयोग अपनी नियमावली 1961 के नियम 23 में संशोधन कर लोगों को पोस्टल बैलेट या डाक मतपत्र की मदद से चुनाव में वोट डालने की सुविधा देता है। मतगणना के दौरान सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होती है। इसके बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती की जाती है।

उत्तराखंड लोकसभा चुनाव में इस बार 93,187 सर्विस मतदाता हैं। गढ़वाल लोकसभा सीट पर सबसे ज्यादा 34,845 सर्विस मतदाता हैं। जबकि राज्य की टिहरी लोकसभा सीट पर 12,862 सर्विस मतदाता हैं। इसके अलावा राज्य की अल्मोड़ा लोकसभा सीट पर कुल 29,105 सर्विस मतदाता हैं। इसी प्रकार नैनीताल-ऊधमसिंह नगर सीट पर कुल 10,629 सर्विस मतदाता हैं जबकि हरिद्वार लोकसभा सीट पर 5746 सर्विस मतदाता शामिल हैं।

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