@शब्द दूत ब्यूरो (03 अप्रैल, 2024)
अल्मोड़ा संसदीय सीट पर भाजपा से दो बार के सांसद अजय टम्टा एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं। पांच साल पहले जीत दर्ज करने के बाद उन्होंने विकास के जरिए गांव का कायाकल्प करने के दावे कर अल्मोड़ा जिले के ताकुला विकासखंड के स्वतंत्रता सेनानी सोबन सिंह जीना के पैतृक गांव सुनोली को गोद लिया। गांव की 1450 की आबादी को उम्मीद थी कि सांसद की नजर गांव पर पड़ने के बाद यहां विकास की बयार बहेगी और उन्हें तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलेगी।
विकास के नाम पर इन पांच सालों में डेढ़ करोड़ रुपये भी खर्च हुए, लेकिन यह गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है और इसकी तस्वीर पहले की तरह है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि सांसद की नजर गांव पर पड़ने के बाद यहां विकास की बयार बहेगी और उन्हें तमाम समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। लेकिन गांव में विकास तो दूर, 10 साल से लोगों ने सांसद अजय टम्टा की शक्ल तक नहीं देखी।
अल्मोड़ा-बागेश्वर हाईवे से चार किमी दूर बसे सुनोली गांव को जोड़ने वाली सड़क सिस्टम की बेरुखी की कहानी बंया कर रही है। यह पूरी सड़क गड्ढों से पटी है, इस पर खतरे के बीच सफर करना ग्रामीणों की मजबूरी बना है। बीमारों और गर्भवती महिलाओं को भी खतरे के बीच अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों की मजबूरी है।
सुनोली गांव के बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं, गर्भवती महिलाएं सभी स्वास्थ्य सुविधाओं से जूझ रहे हैं। गांव में सालों पहले खोले गया स्वास्थ्य उपकेंद्र फार्मासिस्ट के भरोसे संचालित हो रहा है। यहां न तो प्रसव की सुविधा है और न ही बेहतर उपचार की। ऐसे में गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए तो अन्य मरीज उपचार के लिए 40 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगा रहे हैं।
स्वतंत्रता सेनानी और सांसद के गोद लिए गए गांव सुनोली में आंतरिक रास्तों पर खड़ंजे तक नहीं हैं, कंक्रीट तो दूर की बात है। अधिकांश रास्ते बदहाल हैं, इन पर ग्रामीण किसी तरह आवाजाही कर रहे हैं। उम्मीद थी सांसद के गोद लेने के बाद इस गांव की तस्वीर बदलेगी, लेकिन पांच साल बाद भी ऐसा नहीं हो सका है।
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