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क्या किसान आंदोलन की निकल गई हवा? बंटे किसान नेता, संयुक्त मोर्चा ने रखी ये शर्तें

@शब्द दूत ब्यूरो (03 मार्च 2024)

पंजाब के लुधियाना में हुई बैठक के बाद संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की तरफ से किसान आंदोलन के मुद्दों के समाधान के लिए आठ बिंदुओं वाला एक समाधान प्रस्ताव संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा को सौंपा गया है. एसकेएम की छह सदस्यों वाली कमेटी की तरफ से ये प्रस्ताव शंभू बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे KMM (किसान मजदूर मोर्चा) के किसान नेताओं को सौंपा गया है. इस प्रस्ताव को एक ऐसे दृष्टिकोण के तौर पर बताया जा रहा है जो संघर्ष का एक सही आधार और रास्ता मुहैया करवाने वाला है.

कमेटी की तरफ से जिन 8 बिंदुओं को इसमें शामिल किया गया है, वो साल 2020-2021 के दौरान हुए किसान प्रदर्शन के अहम तत्वों पर आधारित हैं. संयुक्त किसान मोर्चा ने संगठनिक ढांचा, संघर्ष की मांगों को ध्यान में रखना, केंद्र सरकार को संघर्ष का मुख्य निशाना बनाना, देशभर के किसानों विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों की भागीदारी, दिल्ली कूच के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से रास्ता रोकने की तरकीबों का ठंडे दिमाग से समाधान निकालना, अनुशासन में रहकर प्रदर्शन को आगे बढ़ाना और साल 2021 में भड़काऊ शक्तियों से हुई हार के अलावा सफल एकजुट किसान संघर्ष का जिक्र किया है.

संयुक्त किसान मोर्चा ने लगाए आरोप

वहीं, किसान आंदोलन और किसान नेताओं के बंटे होने की बात भी सामने आई है. संयुक्त किसान मोर्चा ने शंभू बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान संगठनों पर लगाए गंभीर आरोप है. SKM ने शंभू बॉर्डर पर आंदोलनरत किसान नेताओं सरवन पंढेर और जगजीत डल्लेवाल को पत्र लिखकर कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा को तोड़ने की कोशिशें बंद की जाएं. डल्लेवाल-पंढेर के दोनों मंचों का ये दावा सही नहीं है कि उन्होंने “दिल्ली कूच” के आह्वान से पहले इस समाधान को संयुक्त किसान मोर्चा के साथ जोड़कर एक संयुक्त समाधान बनाने की पहल की है.

उसने कहा कि तमाम किसान संगठनों और उनके नेताओं के साथ बैठक का जो ब्योरा जारी किया गया है, वो ज्यादातर दिल्ली कूच का फैसला लेने से पहले का है. इनके द्वारा जब भी ऐसा प्रयास किया गया है तो संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल संगठनों को तोड़कर अपने फोरम में शामिल करने के उद्देश्य से किया गया है. अब जब केंद्र सरकार की किसान आंदोलन को दबाने की कोशिशें तेज हो रही हैं तो अब दोनों मंचों की ओर से संयुक्त किसान मोर्चा और उसमें शामिल संगठनों को तितर-बितर करने की कोशिशें की जा रही हैं. इसी दृष्टिकोण, समझ और नेतृत्व से बीजेपी सरकार को लाभ हो रहा है. सामान्य समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए इस प्रक्रिया को तुरंत रोका जाना चाहिए.

संयुक्त किसान मोर्चा ने उठाए ये सवाल

संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि 26 जनवरी 2021 को सतनाम सिंह पन्नू और सरवन सिंह पंढेर की जत्थेबंदी द्वारा लाल किले की तरफ जाने का फैसला सही नही था. जगजीत सिंह डल्लेवाल द्वारा दिल्ली मोर्चा खत्म करने के बाद जो मुद्दे उठाए गए गए थे वो प्लेटफॉर्म के अंदर ही सुलझाए जा सकते थे. इन मसलों को लेकर डल्लेवाल का प्लेटफार्म से बाहर जाने का फैसला बिल्कुल सही नहीं था. दिल्ली आंदोलन के वक्त भी और अब के आंदोलन के दौरान भी किसान आंदोलन को जीत की तरफ बढ़ाने के लिए साम्प्रदायिकता, आंदोलन में फूट डालने वाले, अराजकता फैलाने वाली शक्तियां जमकर खलल डाल रही है. इन शक्तियों को यहां से दूर करके ही आंदोलन चलाना चाहिए. इन तीन मुद्दों पर सहमति होने के बाद ही SKM में एकजुट होने पर विचार किया जा सकता है.

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