@शब्द दूत ब्यूरो (20 फरवरी 2024)
नयी दिल्ली। देश की सर्वोच्च अदालत ने आज एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए चंडीगढ़ के मेयर उपचुनाव में चुनाव अधिकारी की धांधली को मानते हुए आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार कुलदीप कुमार को विजयी घोषित किया। देश में चुनावी धांधली के खिलाफ यह फैसला अपने आप में ऐतिहासिक माना जा रहा है।
मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ तथा न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि चंडीगढ़ महापौर चुनाव में चुनाव अधिकारी अनिल मसीह द्वारा ‘चिह्नित’ किए गए सभी आठ मतपत्र आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के पक्ष में हैं।
शीर्ष अदालत ने गत 30 जनवरी को हुई मतों की गिनती के दौरान चुनाव अधिकारी द्वारा मतपत्रों पर निशान लगाने के मामले में सुनवाई करते हुए कहा था कि चुनावी लोकतंत्र में हस्तक्षेप करना सबसे गंभीर बात है और इसके लिए मुकदमा चलाया जाना चाहिए।
आपको बता दें कि मतगणना के दौरान चुनाव अधिकारी अनिल मसीह ने मतपत्रों में हेराफेरी की जिसका वीडियो सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा था।
शीर्ष अदालत ने चुनाव अधिकारी से कहा, ‘वीडियो से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि आप कुछ मतपत्रों को देखते हैं। ऊपर या नीचे क्रॉस का निशान लगाते हैं।’ पीठ ने उनसे पूछा, ‘आपने मतपत्र पर क्रॉस का निशान लगाया है। यह बहुत स्पष्ट है कि आप कुछ मतपत्रों पर क्रॉस का निशान लगा रहे हैं। आपने कुछ मतपत्रों पर क्रॉस का निशान लगाया है या नहीं।’ इस पर अधिकारी ने कहा, ‘आम आदमी पार्टी पार्षद इतना शोर मचा रहे थे- कैमरा! कैमरा! कैमरा! इसलिए मैं उधर देख रहा हूं कि वे किस कैमरे की बात कर रहे हैं। मतदान के बाद मुझे मतपत्रों पर संकेत लगाना पड़ा।’
चुनाव अधिकारी ने आगे कहा, ‘जो मतपत्र विरूपित ( निशान) थे, मैं सिर्फ इस बात पर प्रकाश डाल रहा था कि इसे दोबारा नहीं मिलाया जाना चाहिए। यही एकमात्र कारण था।” पीठ ने कहा, ‘जैसा कि अधिकारी ने स्वीकार किया कि उसने मतपत्रों को विरूपित कर निशान लगाया। उनका जवाब बहुत स्पष्ट है। उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। एक पीठासीन चुनाव अधिकारी द्वारा चुनावी लोकतंत्र में हस्तक्षेप करना सबसे गंभीर बात है।’
इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार मनोज सोनकर को कुलदीप कुमार को मिले 12 मतों के मुकाबले 16 मत हासिल करने के बाद निर्वाचित घोषित किया गया था। मतों की गिनती के दौरान चुनाव अधिकारी ने आप-कांग्रेस गठबंधन उम्मीदवार को मिले आठ मतों को अवैध करार देते हुए खारिज कर दिया था।
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