@विनोद भगत
सूबे की राजनीति में जल्द ही एक बड़े उलटफेर की आशंका जताई जा रही है। एक बार फिर ये माना जा रहा है कि राजनीति के पत्ते फेंटे जाएंगे और प्रदेश में एक बड़ा उलटफेर होगा।ये भी आशंका जताई जा रही है कि जल्द ही प्रदेश की जनता को एक बड़ा सरप्राइज मिलेगा।
दरअसल सूबे में निकाय चुनावों से पहले ये राजनीतिक उठा-पटक होना तय है। निकाय चुनाव से पहले की तैयारी के बीच सत्तारूढ़ दल के साथ ही मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस भी इस बदलाव से प्रभावित होगी। हालांकि अभी निकाय चुनावों को लेकर स्थिति साफ नहीं है।
उत्तराखंड में निकाय चुनावों को लेकर भी बड़ा पशोपेश बना हुआ है। राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो सत्तारूढ़ दल को इस बार निकाय चुनावों में जीत को लेकर शंका बनी हुई है। चूंकि लोकसभा चुनाव 2024 में होने हैं। ऐसे में निकाय चुनावों को लेकर पार्टी का रवैया ढुलमुल ही है। पार्टी के एक खेमे के मानना है कि अगर निकाय चुनाव लोकसभा चुनाव के बाद कराये जाएं तो भाजपा को फायदा होगा।
इधर यूसीसी के ड्राफ्ट की तैयारियां पूरी हो चुकी है लेकिन अभी तक सरकार को यूसीसी पर बनी समिति ने रिपोर्ट नहीं सौंपी है। दरअसल सत्तारूढ़ दल निकाय चुनाव से पहले यूसीसी के बहाने सूबे में एक माहौल अपने पक्ष में करना चाहती है तो वहीं दूसरी ओर यूसीसी से वोटों के ध्रुवीकरण से लाभ और हानि पर मंथन किया जा रहा है। सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इन दिनों दिल्ली दौरे पर हैं। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान से गहन विचार मंथन के बाद ही इस पर कोई फैसला लिया जाएगा।
उधर, यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस का रूख वैसे तो साफ है। लेकिन फिर भी इस मुद्दे पर स्थानीय कांग्रेसी दिग्गज सोच समझ कर बयानबाजी कर रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी यूसीसी पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। जाहिर सी बात है कि कांग्रेस भी इस मामले में आलाकमान के रुख का इंतजार कर रही है।
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