@शब्द दूत ब्यूरो (12 अक्टूबर 2022)
काशीपुर । देश में महिला सशक्तिकरण के खूब दावे किये जाते हैं। लेकिन महिलायें सार्वजनिक जीवन खासकर राजनीति में आकर जनप्रतिनिधि के पद आसीन होती है तो यह देखने में आता है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद उन्हें घर में बैठा दिया जाता है वह मात्र रबर स्टैम्प बन कर रह जाती हैं।
लेकिन समाज में इसका अपवाद भी देखने को मिलता है। आज हम एक ऐसी महिला जनप्रतिनिधि काशीपुर नगर निगम में पार्षद श्रीमती वैशाली गुप्ता के पति संजीव गुप्ता की बात करते हैं। वैशाली गुप्ता पिछले कई वर्षों से नगर पालिका और अब निगम की पार्षद हैं। शब्द दूत ने इस दंपत्ति से एक छोटी और संक्षिप्त बात की।
बातचीत के दौरान पार्षद वैशाली गुप्ता ने बताया कि उन्हें अपने सार्वजनिक और सामाजिक जीवन में काम करने के लिए पति के साथ साथ पूरे परिवार का पूरा सहयोग मिलता है। यही कारण है कि आज वह परिवार के साथ साथ अपने जनप्रतिनिधित्व के दायित्वों के साथ परिवार के दायित्वों को भी भली प्रकार निभा पा रही है।
पार्षद वैशाली गुप्ता के पति का मानना है कि महिलाओं को आगे बढ़ाने से ही हम वास्तविक रूप से महिला सशक्तिकरण कर पायेंगे। एक सक्षम और उत्साही महिला अगर समाज सेवा के क्षेत्र, राजनीतिक क्षेत्र में आना चाहती है तो हमें उसका सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह महिला स्वतंत्रता के पक्षधर हैं और हमेशा रहेंगे। संजीव गुप्ता कहते हैं कि वह वैशाली गुप्ता के पति कहलाना पसंद करेंगे। पार्षद तो एक पद है और संविधान में कहीं भी पार्षद पति नाम से पद का प्रावधान ही नहीं है। वह पार्षद पति शब्द को ही हास्यास्पद मानते हैं।
पार्षद वैशाली गुप्ता के पति संजीव गुप्ता उन पतियों के लिए मिसाल हैं जो महिला सशक्तिकरण के नाम पर पत्नियों को राजनीतिक या सामाजिक जीवन में आगे तो बढ़ाते हैं लेकिन उनके सहारे वह खुद को प्रतिस्थापित करने का प्रयत्न करते हैं। ऐसे लोगों के लिए महिला का नाम और पद सिर्फ इस्तेमाल करने के लिए होता है। पर संजीव गुप्ता इससे अलग सोच रखते हैं।
पार्षद वैशाली गुप्ता भी कहती हैं कि अगर किसी महिला में आगे बढ़ने, समाज के लिए कुछ करने की इच्छा और जज्बा है तो उसे बंधन में नहीं वरन खुले रूप से आगे आने के अवसर देने चाहिए। वैशाली कहती हैं कि इसमें परिवार और समाज दोनों को सहयोग करना होगा।
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