@शब्द दूत ब्यूरो (03 अगस्त, 2022)
उत्तराखंड में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं, विधायकों और तमाम पदाधिकारियों के बीच इन दिनों भारी हलचल है। चर्चा है कि राज्य सरकार की कैबिनेट विस्तार से लेकर प्रदेश भाजपा की नयी टीम तक बड़े बदलाव होने हैं।
एक तरफ, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष का चार्ज संभालने के बाद महेंद्र भट्ट आगामी निकाय, पंचायत व लोकसभा चुनावों के लिए अपनी टीम तैयार करेंगे तो वहीं, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कैबिनेट के साथ ही दायित्वधारियों को लेकर बड़े फैसले कर सकते हैं। इस हलचल के बीच पूर्व सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक के भविष्य को लेकर सवाल भी चर्चा में हैं।
संगठन से लेकर कैबिनेट विस्तार तक में राष्ट्रीय नेतृत्व की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, लेकिन भट्ट और धामी की पसंद और नापसंद का भी अहम रोल होगा। भट्ट का कहना है प्रत्येक कार्यकर्ता महत्वपूर्ण है, जिसकी जहां जरूरत होगी, वहां काम दिया जाएगा। हालांकि, भट्ट के लिए मनपसंद टीम का चयन आसान नहीं होगा। ज़िले के नेता प्रदेश कार्यालय पहुंच रहे हैं तो प्रदेश के नेता दिल्ली दरबार के कनेक्शन तलाश रहे हैं।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष रहे मदन कौशिक अब राजनीतिक पुनर्वास की तलाश में हैं। सीएम धामी से उनकी दूरियां जगजाहिर हैं। ऐसे में संभावना कम ही है कि कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह मिले। जानकार बता रहे हैं कि कौशिक खुद भी कैबिनेट के बजाय राष्ट्रीय संगठन में किसी पद या लोकसभा चुनाव में हरिद्वार से टिकट के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से आश्वासन की ओर देखना चाहेंगे। दूसरी ओर चर्चा है कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का राजनीतिक वनवास अब खत्म हो सकता है।
अभी तक बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रहे मदन कौशिक अब राजनीतिक पुनर्वास की तलाश में हैं. सीएम धामी से उनकी दूरियां जगजाहिर हैं. ऐसे में संभावना कम ही है कि कैबिनेट विस्तार में उन्हें जगह मिले। जानकार बता रहे हैं कि कौशिक खुद भी कैबिनेट के बजाय राष्ट्रीय संगठन में किसी पद या लोकसभा चुनाव में हरिद्वार से टिकट के लिए राष्ट्रीय नेतृत्व से आश्वासन की ओर देखना चाहेंगे। दूसरी ओर चर्चा है कि पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत का राजनीतिक वनवास अब खत्म हो सकता है।
मार्च 2021 में सीएम पद से हटने के बाद से ही त्रिवेंद्र रावत सियासी वनवास पर हैं। पिछले दो दिन से दिल्ली दौरे पर रावत ने बीजेपी के कई नेताओं के साथ ही राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष से मुलाकात की। इस मुलाकात के खास मायने निकाले जा रहे हैं। चर्चा है कि उन्हें राष्ट्रीय संगठन में कोई ज़िम्मेदारी दी जा सकती है क्योंकि रावत मूलतः संगठन से ही निकले कार्यकर्ता हैं और पहले भी वह संगठन में कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
भाजपा कार्यकर्ता 16 महीनों से दायित्वों की उम्मीद पाले बैठे हैं। त्रिवेंद्र रावत सरकार में सौ से अधिक कार्यकर्ताओं को दायित्वों से नवाज़ा गया था। लेकिन मार्च 2021 में उनके हटते ही दायित्वधारियों की भी छुट्टी हो गई थी। तबसे तीरथ रावत सरकार रही या धामी सरकार, इन कार्यकर्ताओं के हाथ खाली रहे। धामी पार्ट टू में भी चंपावत सीट छोड़ने वाले पूर्व विधायक कैलाश गहतोड़ी के अलावा अभी तक किसी और को दायित्व नहीं मिला।
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