@शब्द दूत ब्यूरो (14 जुलाई 2022)
पद्म श्री देश के प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है। पद्म श्री पाना किसी भी नागरिक के लिए गौरव की बात है।
ये पुरस्कार देने के लिए बनी चयन समिति के द्वारा पुरस्कारों की घोषणा करने से पहले सरकारी स्तर पर गहन समीक्षा और पुरस्कृत व्यक्ति के द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किये गये उसके योगदान का आंकलन करने के बाद ही दिया जाता है।
लेकिन एक आर्गनाइजेशन ने पद्म पुरस्कार देने के लिए लोगों से आवेदन मांगे हैं। जो विज्ञापन इस संस्था के द्वारा दिया गया है उसमें “मोदी जी का अरमान सामान्य लोगों को असामान्य सम्मान” टैग लाइन के साथ अशोक की लाट का इस्तेमाल किया गया है साथ ही आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर को भी दर्शाया गया है।
गोल्डन स्पैरो कन्सलटेंट नामक फर्म का दावा है कि वह देश के सामान्य नागरिकों को पद्म श्री ही नहीं अन्य सम्मान दिलाने के लिए भी काम करती है। इस संस्था के एक सदस्य डॉ तिलक कंवर ने दूरभाष पर बताया कि संस्था द्वारा आपके द्वारा किसी भी क्षेत्र में किये गये कार्यों के आधार पर उनके पांच विशेषज्ञ सदस्यों की टीम एक प्रोफाइल तैयार करती है और उसे बनाकर पुरस्कार के लिए बनी सरकारी समिति को भेजती है। अलबत्ता डॉ कंवर ने बताया कि फर्म केवल आपके प्रोफाइल के आधार पर आपका आवेदन तैयार करवाती है लेकिन पुरस्कार मिलने की गारंटी नहीं लेती है।
उन्होंने बताया कि इस सब प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आपको 30 हजार रुपये का शुल्क इस संस्था को देना होगा। संस्था की ओर से जो विज्ञापन जारी किया गया है उसमें राष्ट्रीय प्रतीक चिह्न अशोक की लाट का प्रयोग किया गया है। साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी जिक्र किया गया है। सवाल यह है कि क्या अशोक की लाट का प्रयोग कोई निजी संस्था कर सकती है?
राष्ट्रीय चिन्ह का उपयोग करने पर क्या है दंड?
भारत के राज्य संप्रतीक (प्रयोग का विनियम) अधिनियम 2005 और भारत का राज्य संप्रतीक (प्रयोग का विनियम) नियम 2007 के तहत अधिकृत व्यक्तियों, संस्थाओं और संगठनों आदि के अलावा किसी अन्य को अशोक चिन्ह के उपयोग की अनुमति नहीं है। यह दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर दो साल की सजा या पांच हजाए रुपए जुर्माना अथवा दोनों सजाएं एक साथ हो सकती हैं।
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