@शब्द दूत ब्यूरो (07 जुलाई 2022)
केंद्र सरकार ने स्मार्ट सिटी बनाने के लिए दिल्ली के 53 मंदिरों को तोड़ने के लिए दिल्ली सरकार के गृह विभाग को एक पत्र लिखकर अनुमति मांगी है। केंद्र के मंदिर तोड़ने की अनुमति के इस पत्र के बाद दिल्ली विधानसभा में केन्द्र सरकार के विरूद्ध निंदा प्रस्ताव पेश किया है।
यह जानकारी आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने देते हुए कहा कि केंद्र ने नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड (एनबीसीसी) द्वारा स्मार्ट सिटी विकसित करने के उद्देश्य के लिए 53 मंदिरों को ध्वस्त करने की आवश्यकता बताई है। जिन मंदिरों को तोड़ने की मांग की गई है, उनमें राम, कृष्ण, दुर्गा और साईं बाबा के मंदिर शामिल हैं।
उधर भाजपा विधायक अजय महावर ने आप नेताओं के इस बयान पर यह तो नहीं कहा केंद्र ने अनुमति मांगी या नहीं अलबत्ता यह जरूर कहा कि पूरा देश जानता है कि कौन मंदिर चाहता है और कौन तुष्टीकरण में दिलचस्पी रखता है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप जिस ‘सॉफ्ट हिंदुत्व को बढ़ावा दे रहे हैं वह विफल हो गया है। ‘आप’ नेता अब मंदिरों की बात कर रहे हैं। वो इमामों को वेतन देते हैं, लेकिन दूसरे धर्मों के पुजारियों को वेतन नहीं देते हैं।
भाजपा पर निशाना साधते हुए आप विधायक दिलीप पांडे ने कहा कि 53 मंदिरों को तोड़ने की केंद्र की यह मांग भगवा पार्टी के पाखंड को उजागर करती है।
वहीं मंदिरों को ध्वस्त करने की अनुमति मांगने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली सरकार को भेजे गए एक पत्र के खिलाफ बीते मंगलवार को दिल्ली विधानसभा में निंदा प्रस्ताव पारित किया। यह प्रस्ताव आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक और पार्टी के मुख्य सचेतक दिलीप पांडे ने सदन में निंदा प्रस्ताव पेश किया। कालकाजी से आप विधायक आतिशी ने कहा कि भाजपा की पैसों की लालसा पूरी नहीं हो रही। अब 53 मंदिरों को गिराने की बारी आई है। यह सदन भाजपा और केंद्र की कड़ी निंदा करता है और भाजपा से आग्रह करता है कि वह हमारे विश्वास और मंदिरों को बख्श दें।
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