@शब्द दूत ब्यूरो (06 जून 2022)
दो संत आपस में एक दूसरे के समधी बन गये। लेकिन इसके लिए उन्होंने अपने बेटे बेटी की शादी नहीं वरन अपने-अपने कुत्ते और कुतिया की शादी हिंदू रीति रिवाज से कराई। बाकायदा शादी में हिंदू धर्म के अनुसार द्वार चार, फेरे व कलेवा की रस्म निभाई गई।
हमीरपुर के सौंखड और सिमनौडी गांव में मनासर बाबा शिव मंदिर के महंत स्वामी द्वारका दास महाराज ने अपने कुत्ते कल्लू का ब्याह दूसरे गांव के हनुमान मंदिर के महंत स्वामी अर्जुन दास की कुतिया भूरी के साथ किया।
विवाह की तारीख 5 जून को तय की गई। विवाह समारोह के लिए निमंत्रण पत्र बाटें गये। बाकायदा बारात हिंदू धर्म के मुताबिक सभी रस्म निभाते हुए हनुमान मंदिर तक पहुंची जहाँ स्वागत सत्कार के बाद बारातियों को भोजन कराया गया। बाद में बारात को विदा कराया गया।
कुत्ते कुतिया की यह शादी गांव में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इस विवाह को लेकर अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं।
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