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मजबूती का नाम बीजेपी है @राकेश अचल

राकेश अचल, लेखक देश के जाने-माने पत्रकार और चिंतक हैं, कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में इनके आलेख प्रकाशित होते हैं।

देश की संसद में भाजपा की ओर से कोई मुस्लिम सदस्य नहीं होगा .ये भारत के संसदीय इतिहास में किसी राजनीतिक दल का नया इतिहास है. इसे आप स्वर्णिक अक्षरों में पढ़ें या स्याह अक्षरों में ,ये आपके ऊपर निर्भर है ,लेकिन हकीकत से न आप मुंह चुरा सकते हैं और न हम .आजादी के अमृतकाल में देश की 18 करोड़ से अधिक वाली मुस्लिम आबादी को अब भारत में सत्तारूढ़ भाजपा के अलावा अपना कोई नया रहनुमा खोजना पडेगा .

आप मानें या न मानें लेकिन मै मानता हूँ कि भाजपा की तरह देश में ऐसी कोई दूसरी पार्टी नहीं है जो अपने राजनीतिक एजेंडे पर सौ फीसदी ईमानदारी से काम करती हो .भाजपा की तरह एक जमाने में कम्युनिस्ट भी अपने एजेंडे को लागू करने में ईमानदार माने जाते थे,किन्तु वे इतने निर्मम नहीं थे जितनी कि भाजपा है,और शायद इसीलिए कम्युनिष्ट आज देश की राजनीति में हाशिये ये पर हैं .

भारत की संसद मुस्लिम विहीन नहीं है ,दूसरे दलों के अनेक मुस्लिम सदस्य दोनों सदनों में हैं किन्तु भाजपा का कोई सदस्य अब न लोकसभा में होगा और न राज्य सभा में .लोकसभा में सदस्यों की संख्या 545 और राज्य सभा में 245 है .भाजपा को आखिर मुस्लिम सदस्य क्यों नहीं चाहिए ? क्या भाजपा देश के मुस्लिमों को इतना अविश्वसनीय मानती है कि उन्हें संसद के किसी भी सदन में नहीं रखना चाहती ? ये सहज सवाल हैं जो भाजपा से किये जाते रहेंगे ,लेकिन उनके उत्तर शायद ही देश को और देश के मुसलमानों को मिलें .मुमकिन है कि भविष्य में भाजपा अपनी मुस्लिम विहीन राजनीति पर पुनर्विचार करे लेकिन आज तो देश के मुसलमानों को भाजपा से निराश होना ही पडेगा .
भाजपा और उससे पहले जनसंघ और उससे पहले राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का स्पष्ट मानना है की जब 1947 में पाकिस्तान बन ही गया था तो देश के सभी मुसलमानों को वहां चला जाना चाहिए था .भाजपा के लिए आज मुसलमान देश के लिए एक गैर जरूरी आबादी है .भाजपा के नेता ही नहीं बल्कि देश के प्रधानमंत्री जी तक का आचरण इस धारणा की पुष्टि करता है. भाजपा मुसलमानों के बिना राजनीति करे या उन्हें साथ रखकर ये भाजपा का अंदरूनी मामला है लेकिन भाजपा के केंद्र में सत्तारूढ़ रहते हुए ये व्यवहार सोचनीय अवश्य है .

बेहद चौंकाने वाला तथ्य ये है कि भाजपा मुसलमानों से आतंकित है और देश के मुसलमान भाजपा से आतंकित हैं .देश में 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक मुस्लिम जनसंख्या 17.22 करोड़ थी जिसमे 2001 केमुकाबले में 24.6 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी। 2011 में भारत में मुसलमानों का प्रतिशत भारत की कुल आबादी का 14.23 प्रतिशत था।भाजपा देश को अक्सर डराती रहती है की यदि मुस्लिम आबादी इसी रफ्तार से बढ़ी तो आने वाले कुछ ही वर्षों में भारत में हिन्दू अल्पसंख्यक और मुसलमान बहुसंख्यक हो जायेंगे .मुस्लिमों की बढ़ती आबादी से आतंकित भाजपा के अनेक सांसद और संघ प्रमुख हिन्दुओं से अपनी आबादी बढ़ने का आव्हान करते रहते हैं .

भाजपा ने मुस्लिम नेताओं को हमेशा ‘ शोपीस ‘ की तरह इस्तेमाल किया .दुर्भाग्य ये कि मुस्लिम नेता भाजपा के हाथों खिलौना बने भी रहे. पहले सिकंदर बख्त,बाद में एमजे अकबर और मुख्तार अब्बास नकबी तथा सैयद जफर इस्लाम भाजपा के ‘ शो पीस ‘ में मुस्लिम नेता थे. एक शाहनबाज खान हुआ करते थे उन्हें वापस बिहार भेज दिया गया .अब राज्य सभा में एक भी मुस्लिम सांसद को प्रत्याशी न बनाकर भाजपा ने लोकसभा की ही तरह राजयसभा में भी भाजपा को मुस्लिम विहीन कर लिया है .भाजपा को पता है कि इस मुद्दे पर भाजपा में कोई मुसलमान बाग़ी नहीं हो पायेगा .भाजपा को पता है कि इस मुद्दे पर दल के बाहर उसकी आलोचना होगी लेकिन उसे इस आलोचना की कोई फ़िक्र नहीं है .
सबका साथ ,सबका विकास का नारा कलंकित न हो इसलिए मुमकिन है कि भविष्य में भाजपा किसी अल्पसंख्यक नेता को अपने शोकेस में किसी दूरी भूमिका में सजा ले .मुकिन है कि किसी को राज्यपाल बना दे. मुमकिन है कि किसी को कोई दूसरी तरह का रबर स्टाम्प बना ले .अगर कोई तीखी प्रतिक्रिया हुई तो मुमकिन है की आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा मुसलमानों कि बारे में फिर सोचे .कुल मिलाकर मुस्लिम तुष्टिकरण को तिलांजलि देने का भाजपा का ये एक दुस्साहसिक कदम है .हिन्दू जगत इसका स्वागत कर सकता है किन्तु मै नहीं .

भाजपा कि राजनीतिक इतिहास में जोड़े जा रहे इस नए अध्याय का लाभ भाजपा कि इतर दूसरे राजनीति दल उठा सकते हैं लेकिन उनमें भाजपा जितनी प्रबल इच्छाशक्ति होना चाहिए. देश कि मुसलमान भाजपा की इस संकीर्णता से क्षुब्ध होकर एक बार फिर कांग्रेस या कांग्रेस जैसे दूसरे दलों की और लौट सकते हैं ,कांग्रेस इस दिशा में कितनी कामयाब होगी ये कहना कठिन है. क्योंकि इस समय कांग्रेस कि बारे में कुछ भी कहना कठिन है .कांग्रेस सुधरने का नाम ही नहीं ले रही. दल चलाने की कांग्रेस की सामंती मानसिकता आज भी काम कर रही है .राज्यसभा चुनाव कि लिए उत्तर प्रदेश कि तीन नेताओं को राजस्थान से भेजना और क्या है ?

भाजपा कि नए इतिहास में मुस्लिमों को जितनी जगह मिलना थी उतनी मिल चुकी.देश कि मुसलमानों को अब भाजपा से ज्यादा उम्मीद करना भी नहीं चाहिए. भाजपा की उनके ऊपर ये कृपा कम नहीं है कि उसने अभी तक देश कि मुसलमानों कि साथ चीन कि मुसलमानों जैसा बर्बर बर्ताव शुरू नहीं किया है .आँखें बंद कर मस्जिदें नहीं ढहाई हैं.केवल मस्जिदों से लाउड स्पीकर ही हटाए हैं .भाजपा मुसलमानों कि साथ कुछ भी कर सकती है क्योंकि उसके दिमाग में हिन्दू राष्ट्र जमा बैठा है .ऐसा हिन्दू राष्ट्र जिसमें सभी आबादी शिखाधारी हो,केसरिया या भगवा रंग कि वस्त्र पहनती हो ,रोजगार की मांग किये बिना सड़कों पर जय श्रीराम कि नारे खुद लगाती हो और दूसरों को भी मजबूर करती हो .

बहरहाल अभी मुद्दा भाजपा कि मुस्लिम विहीन होने का है .इस बारे में हमारी टिप्पणी का कोई अर्थ नहीं है .अब मुसलमान खुद सोचें ,खुद फैसला करें .क्योंकि अब गेंद उन्हीं कि पाले में है .मुसलमान जैसा चाहें ,इसे कर सकते हैं .लेकिन एक बात है की मुसलमानों को यदि वे अपने आपको भारतीय मानते हैं तो भाजपा कि इस रवैये से बिलकुल डरना नहीं चाहिए बल्कि अपने आपको उनसे ज्यादा बड़ा हिन्दुस्तानी बनकर दिखाना चाहिए .देश की संसद में जाने कि और भी रास्ते हैं .
@ राकेश अचल

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