@शब्द दूत ब्यूरो(28 मई 2022)
देहरादून । हरिद्वार लोक सभा में भाजपा के बागी उम्मीदवार मनीष वर्मा ने आज एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए 3 न्यूज पोर्टल की उस खबर का खण्डन किया कि हरिद्वार सांसद रमेश पोखरियाल के विरुद्ध दायर चुनाव याचिका माननीय उच्च न्यायालय द्वारा फटकार लगाते हुए निरस्त कर दी है और उनके वकील के अनुसार याचिका डिफेक्टिव थी, जो सरासर गलत बयान है ।
श्री मनीष वर्मा ने कहा कि पत्रकारिता को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है एवम कोई भी समाचार बिना क्रॉस चेक करे अथवा तथ्यो को साबित किए बिना नहीं छापना चाहिए खासकर न्यायालय के मामले जिनमे अभी कोई अंतिम निर्णय न आया हो एवम आरोप लगाने से सत्य को हतोत्साहित नही किया जा सकता ।
श्री वर्मा ने कहा जिन पोर्टल ने उक्त समाचार घुमा फिरा कर छापा है उन्हे अपने गिरेबान में भी झांक लेना चाहिए की उनका इतिहास एवं अस्तित्व क्या रहा है परंतु एक स्वयं एक पत्रकार होने के नाते वे मर्यादा में रहते हुए उन पोर्टल के स्वामियों के बारे में कोई तथ्य प्रकाशित नहीं कर रहे है ।
श्री मनीष वर्मा ने कहा कि उनके अधिवक्ता हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील श्री धमेंद्र बरथवाल ने उन्हें बताया कि उनकी चुनाव याचिका माननीय न्यायालय द्वारा निरस्त नहीं की गई है अपितु मामला माननीय सर्वोच्च न्यायालय में भी लंबित है तथा जिस दिन उक्त समाचार प्रकाशित हुआ उस दिन वो दूसरे कोर्ट में बहस कर रहे थे एवम न्यायालय में कोई उपस्थित ही नही था तो किसको फटकार लगी और किसने बहस की और किसे डिफेक्टिव याचिका थी यह अपने आप में प्रश्न चिन्ह है मात्र उनके उपस्थित ने होने पर याचिका डिफॉल्ट इन डिसमिस की गई थी , जो पुनः रिस्टोर हो चुकी है और आज की तिथि में बखूबी न्यायालय में गतिमान है ।
ज्ञात हो की रमेश पोखरियाल ने अपने चुनाव में दिए गए शपथ पत्र में राज्य सरकार को उनके मुख्यमंत्री काल की देयताओ को छुपाया था बाद में माननीय उच्च न्यायालय ने ही रमेश पोखरियाल सहित अन्य मुख्यमंत्रियों पर सरकारी देय तत्काल भुगतान करने का आदेश दिया जिस पर राज्य सरकार ने विधेयक लाकर देयताओं को माफ कर दिया था बाद में एक पुनः याचिका के तहत उच्च न्यायालय ने सरकार द्वारा देयताओ को माफ किए विधेयक को निरस्त करते हुए तत्काल भुगतान करने हेतु कहा था तथा रमेश पोखरियाल पर भुगतान न करने पर माननीय उच्च न्यायालय ने अवमानना याचिका स्वीकार करते हुए नोटिस जारी किया था जिसपर रमेश पोखरियाल सुप्रीम कोर्ट से स्टे लाए हुए है और ऐसे में चुनाव याचिका निरस्त हो ही नही सकती थी ।
कुल मिलाकर रमेश पोखरियाल अपने दिए शपथ पत्र ,माननीय उच्च न्यायालय के पैसे भुगतान करने के आदेश और अवमानना याचिका के चलते बुरी तरह घिरे हुए है एवम सांसदी खतरे में है ।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal
