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दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- ‘शोले’ आईकॉनिक फिल्म, इसका टाइटल आम इस्तेमाल के लिए नहीं

@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (28 मई, 2022)

शोले को भारतीय सिनेमा के इतिहास की एक आईकॉनिक फिल्म कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यह फिल्म अपने आप में एक मील का पत्थर है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने शोले नाम से अपना बिजनेस चलाने वाले एक शख्स पर 25 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। शोले फिल्म के निर्माताओं ने इस शख्स के खिलाफ केस दर्ज कराया था।

जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ट्रेडमार्क मुकदमे की सुनवाई कर रही थीं, जिसमें तर्क दिया गया था कि फिल्मों और उनके टाइटल को ट्रेडमार्क कानून के तहत मान्यता दी जा सकती है। जस्टिस सिंह ने इस तर्क को सही ठहराया है।

शोले फिल्म के निर्माताओं ने आरोप लगाया था कि एक व्यापारी ने कई उल्लंघन करते हुए शोले नाम से डोमेन नेम रजिस्टर कराया, शोले नाम से मैगजीन पब्लिश कराई और फिल्म की तस्वीरों वाली चीजों की बिक्री की। व्यापारी ने sholay.com नाम से एक वेबसाइट बनाई थी, जिसे अमेरिका में रजिस्टर किया गया था।

कोर्ट का कहना है कि शोले आइकॉनिक फिल्म का नाम है, इसलिए इसे सुरक्षित रखना और इस नाम के गलत इस्तेमाल को रोकना जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा है कि शोले जैसे टाइटल आम शब्द कहलाए जाने की सीमा को पार गए हैं। इसलिए बिजनेसमैन को शोले फिल्म के निर्माताओं- शोले मीडिया एंड एंटरटेनमेंट प्राइवेट लिमिटेड और सिप्पी फिल्म्स प्राइवेट लिमिटेड- को 25 लाख रुपए देने होंगे। इसके लिए कोर्ट ने प्रतिवादी पक्ष को तीन महीने का समय दिया है।

कोर्ट ने कहा कि ‘शोले’ नाम से वेबसाइट बनाना और उस पर शोले की ही डीवीडी समेत कई उत्पाद बेचना साफ तौर पर बदनीयती है। अगर कोई फिल्म देश की कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय रही है, तो वह शोले है। इस फिल्म के किरदार, डायलॉग, सेटिंग और बॉक्स ऑफिस पर इसका कलेक्शन अभूतपूर्व है। इसमें कोई शक नहीं है कि शोले भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी, रिकॉर्ड-ब्रेकिंग फिल्मों में से एक है। इसलिए शोले नाम को खास प्रोटेक्शन दिया है। कोर्ट ने यह फैसला 23 मई को सुनाया।

प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि फिल्म का टाइटल प्रोटेक्शन के लिए मान्य नहीं है और इंटरनेट के दौर में तो कंफ्यूजन की कोई जगह ही नहीं होनी चाहिए। ‘शोले’ शब्द तो डिक्शनरी में भी शामिल है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पैसे वसूलने के लिए यह केस दर्ज किया है।

कोर्ट ने कहा कि ‘शोले’ नाम से वेबसाइट बनाना और उस पर शोले की ही डीवीडी समेत कई उत्पाद बेचना साफ तौर पर बदनीयती है। अगर कोई फिल्म देश की कई पीढ़ियों के बीच लोकप्रिय रही है, तो वह शोले है। इस फिल्म के किरदार, डायलॉग, सेटिंग और बॉक्स ऑफिस पर इसका कलेक्शन अभूतपूर्व है। इसमें कोई शक नहीं है कि शोले भारतीय इतिहास की सबसे बड़ी, रिकॉर्ड-ब्रेकिंग फिल्मों में से एक है। इसलिए शोले नाम को खास प्रोटेक्शन दिया है। कोर्ट ने यह फैसला 23 मई को सुनाया।

प्रतिवादी पक्ष ने तर्क दिया कि फिल्म का टाइटल प्रोटेक्शन के लिए मान्य नहीं है और इंटरनेट के दौर में तो कंफ्यूजन की कोई जगह ही नहीं होनी चाहिए। ‘शोले’ शब्द तो डिक्शनरी में भी शामिल है। उन्होंने फिल्म निर्माताओं पर यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने पैसे वसूलने के लिए यह केस दर्ज किया है।

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