
ग्वालियर में पूरे 76 साल बाद दूसरा मेडिकल कालेज खुलने जा रहा है .तो दूसरा मेडिकल कालेज निजी क्षेत्र का होगा .इसे देवराज इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज नाम से जाना जाएगा .ग्वालियर के चिकित्सा इतिहास में ये तीसरा ऐसा संस्थान है जिसकी स्थापना की कहानी बेहद रोचक है .ग्वालियर में पहला मेडिकल कालेज 1946 में तत्कालीन शासक जीवाजी राव सिंधिया के पुत्र माधवराव सिंधिया के जन्म की ख़ुशी में खोला गया था .उस समय मेडिकल कालेज की स्थापना के लिए सिंधिया शासकों ने 20 लाख रूपये की राशि दी थी. बाद में 10 लाख रूपये की राशि घनश्यामदास बिड़ला ने भी दान स्वरूप प्रदान की थी. इस तरह प्रदेश के पहले और देश के 17 वे मेडिकल कालेज की आधार शिला लार्ड वावेल के हाथों ग्वालियर में रखी गयी .इसका उद्घाटन 1 अगस्त 1946 को तत्कालीन महाराजा जीवाजी राव सिंधिया ने अपनी माताश्री गजराराजा के नाम से किया .
पिछले 76 साल में दुनिया कहाँ से कहाँ पहुँच गयी लेकिन ग्वालियर में कोई दूसरा मेडिकल कालेज नहीं खुल सका .1948 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्ल्भ भाई पटेल ने कमलाराजा अस्पताल का और 1952 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल ने जय आरोग्य अस्पताल समूह का उद्घाटन किया था .
तीस साल तक ग्वालियर में कोई दूसरा चिकित्सा संसथान खड़ा नहीं हो पाया ,लेकिन 1971 में जनसंघ के एक युवा नेता शीतला सहाय ने अपने इकलौते पुत्र राजीव सहाय की स्मृति में ग्वालियर में एक कैंसर अस्पताल खोलने के लिए जन विकास न्यास की स्थापना की और जन सहयोग से 1977 में बाकायदा कैंसर अस्पताल खोल दिया .सहाय के पुत्र को कैंसर जैसा लाइलाज रोग हुया था और अल्पायु में ही उसका निधन हो गया था .
मांडरे की माता नाम की पहाड़ी पर कोई 266 एकड़ में बने इस अस्पताल की क्षेत्रीय इस्टीट्यूट का दर्जा हासिल करने में 3 साल लग गए .शीतला सहाय का बहुत मन था की उनका ये अस्पताल एक मेडिकल कालेज के रूप में सामने आया लेकिन 2011 में अपने निधन तक उन्हें इस दिशा में कोई कामयाबी नहीं मिली ,हालाँकि सहाय इस बीच प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे .वे पहली बार 1967 में विधानसभा के लिए चुने गए थे और उनका राजनीतिक कद भी कम नहीं था ,लेकिन सफलता नहीं मिलना थी सो नहीं मिली .
इसके बाद ग्वालियर को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए 1984 के बाद सक्रिय हुए ग्वालियर के तत्कालीन संसद और केंद्रीय मंत्री माधव राव सिंधिया ने ग्वालोर में नया मेडिकल कालेज खोलने के लिए प्रयत्न किये. उन्होंने 1988 में गोला का मंदिर पर राजीव गाँधी के नाम से एक बड़े अस्पताल की आधार शिला रखवाई लेकिन ये अस्पताल कभी बन नहीं सका. इसे बनाने के लिए बाद में फिल्म अभिनेत्री रेखा भी सामने आयीं ,वे अपने पति मुकेश अग्रवाल के नाम से अस्पताल बनाने के लिए इच्छुक दिखाई दिन लेकिन अज्ञात कारणों से बात बनी नहीं .तब से लेकर अब तक सिंधिया और बाद में उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दिल्ली से अनेक नामी अस्पतालों को ग्वालियर लाने की कोशिश की किन्तु कामयाबी नहीं मिली और प्रस्तावित अस्पताल स्थल काजी हाउस में बदल गया .
ग्वालियर में लम्बे अरसे बाद निजी क्षेत्र में देवराज के नाम से जिस अस्पताल की आधार शिला रखी गयी उसके पीछे भी पुत्रमोह ही है .ये अस्पताल ग्वालियर के प्रतिष्ठित किराड़ परिवार के युवक देवराज किराड़ की स्मृति में बनाया जा रहा है. देवराज ने संदिग्ध परिस्थितियों में आत्मघात कर लिया था .उनकी मृत्यु हमेशा रहस्य बनी रही .इस अस्पताल को भाजपा के नेता और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा खुद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का परोक्ष समर्थन प्राप्त है .शिवराज सिंह की पत्नी श्रीमती साधना सिंह ने स्वयं आभा किराड़ महासभा की अध्यक्ष की हैसियत से इस मेडिकल कालेज की स्थापना में रूचि दिखाई है
डिम्स नाम का ये निजी मेडिकल कालेज 12 .50 लाख़ वर्ग फुट में बनाया जाएगा और इसमें 780 बिस्तर का प्रावधान किया जा रहा है.कोई 600 करोड़ की लागत वाला ये निजी क्षेत्र का ये मेडिकल कालेज ग्वालियर अंचल की स्वास्थ्य सेवाओं में मील का पत्थर साबित होगा .लेकिन याद रखिये इन दोनों मेडिकल कालेजों की नीव में परिवार के पुत्रों का प्रेम ही है .ग्वालियर में किसी पुत्री की स्मृति में अभी कोई मेडिकल कालेज नहीं बना .प्रदेश सरकार जरूर अब नए मेडिकलकॉलेज खोलने में गति ला रही है. पास के जिले दतिया में मेडिकल कालेज खुल चुका है,शिवपुरी का नंबर है ,विदिशा में भी मेडिकल कालेज की स्थापना हो चुकी है.इंदौर में निजी क्षेत्र में अस्पताल पहले से ही है भोपाल के पास भी ये सुविधा है ,अब ग्वालियर नाम भी इसमें शामिल हो जाएगा
@राकेश अचल
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