छह दिसंबर 2019 को हुई एक मुठभेड़ में मारे गए गैंगरेप के आरोपियों की मौत को जांच आयोग ने हत्या करार देते हुए आरोपी 10 पुलिस कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर केस चलाने का आदेश दिया है। जांच आयोग का गठन सुप्रीम कोर्ट ने किया था।
27 नवंबर 2019 को हैदराबाद के तेलंगाना में एक महिला पशु चिकित्सक की गैंगरेप के बाद जिंदा जलाकर मार दिया गया था। पुलिस ने गैंगरेप के चारों आरोपियों को तड़के तीन बजे मुठभेड़ में मार गिराया था। तब पूरे देश में इस घटना की प्रतिक्रिया आई थी। पुलिस का कहना था कि टोल प्लाजा से महिला डॉक्टर को अगवा कर चार आरोपियों ने उसके साथ गैंगरेप किया। फिर सबूत मिटाने के उद्देश्य से उसे जिंदा जला दिया था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त जांच आयोग ने आज 2019 के चर्चित हैदराबाद एनकाउंटर को फर्जी करार दिया है। एनकाउंटर की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त जस्टिस सिरपुरकर आयोग ने इस केस में 10 पुलिसवालों पर हत्या का मामला चलाने की सिफारिश की है। आयोग ने अपनी सिफारिश में लिखा कि पुलिसवालों ने जानबूझकर ऐसे गोलियां चलाई कि वो मर जाएं।
6 दिसंबर को तड़के करीब 3 बजे पुलिस ने चारों आरोपियों को संदिग्ध एनकाउंटर में मार गिराया था। पुलिस के मुताबिक आरोपी पुलिस से हथियार छीनकर भागने लगे थे। जवाबी कार्रवाई में उनकी मौत हुई। हालांकि तब जानकारों ने पुलिस की इस थ्योरी को गलत बताया था। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित जांच आयोग को जांच का जिम्मा दिया गया था।
आज इस एनकाउंटर को सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित आयोग फर्जी माना है। आयोग ने एनकाउंटर में शामिल 10 पुलिसवालों को इसका दोषी बताया है और इनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने जांच आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का आदेश दिया है। साथ ही आगे की कार्रवाई के लिए मामला तेलंगाना हाई कोर्ट भेज दिया है।
आज चीफ जस्टिस एन वी रमना की अध्यक्षता वाली बेंच ने रिपोर्ट को खोला। तेलंगाना सरकार के लिए पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने रिपोर्ट को फिलहाल गोपनीय रखने का अनुरोध किया। लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया। चीफ जस्टिस ने कहा, “इसमें गोपनीयता की कोई बात नहीं। हमारे आदेश पर जांच हुई और कुछ लोगों को दोषी पाया गया। राज्य सरकार रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करे।
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