@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (05 मई, 2022)
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने दावा किया है कि भारत मे कोरोना से 47 लाख मौतें हुई हैं। यानी कि भारत की तरफ से दिए गए आंकड़ों से 47 लाख ज्यादा लोगों की कोरोना से मौत हुईं हैं। डब्ल्यूएचओ ने ये भी दावा किया है कि दुनियाभर में कोरोना से साल 2020-2021 में सभी देशों की तरफ से दिए गए आंकडों से एक करोड़ 49 लाख ज्यादा मौतें हुईं हैं। उसका कहना है कि 84% मौतें केवल दक्षिण पूर्व एशिया, यूरोप और अमेरिका में हुई हैं।
डब्ल्यूएचओ के आंकड़ों पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के शीर्ष आधिकारिक सूत्रों ने कहा, इस डेटा पर हमें आपत्ति है। डब्लूएचओ के मॉडल, डेटा कलेक्शन, डेटा सोर्स, प्रक्रिया ( मेथोडोलॉजी) पर सवाल है। हम चुप नहीं रहेंगे, सभी ऑफिशियल चैनल का हम इस्तेमाल करेंगे और इस डेटा की आपत्ति को हम एग्जीक्यूटिव बोर्ड में रखेंगे।
केंद्रीय अधिकारी ने कहा, 17 राज्यों के आधार पर डेटा है तो 17 राज्यों को किस आधार पर चुना गया? हमारे लगातार पूछने पर चार महीने बाद इन राज्यों के नाम बताए गए। कब तक या किस वक्त तक का डेटा डब्लूएचओ ने लिया, जानकारी नहीं दी। नवंबर से केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने डब्लूएचओ को इस संबंध में 10 चिट्ठियां लिखीं पर जवाब किसी का डब्लूएचओ ने नहीं दिया।
अधिकारी ने कहा कि डब्लूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस के भारत दौरे पर इस तरह के डाटा को लेकर सवाल उठाया गया तो उन्होंने कहा “हमारी टेक्निकल टीम इसको देख रही है।” मौत के ये आंकड़े राज्यों की वेबसाइट, अखबारों में आरटीआई के हवाले से छपी खबरें और टेलीफोनिक सर्वे के ज़रिए लिया गया है।ऑफिशियल डेटा हमसे क्यों नहीं लिया गया?
अधिकारी ने कहा कि डब्लूएचओ ने महाराष्ट्र, केरल, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल, पंजाब, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम, आंध्र प्रदेश, चंडीगढ़ बिहार, कर्नाटक, मध्यप्रदेश और यूपी के आंकड़े लिए हैं। डब्लूएचओ की दलील है कि इन राज्यों में भारत की 60% आबादी है। हमने 2020 का डेटा दिया। 2021 का डेटा आने वाला है तो हम देंगे। हमारा डेटा बर्थ एंड डेथ रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया से आता है, जो आने वाला है औऱ आते ही हम इसे साझा करते हैं। हमें टियर 2 में क्यों रखा गया? जबकि छोटे छोटे देश जहां आंकड़ा सम्मिलित करने का सही मैकेनिज्म नहीं वो टियर 1 में कैसे?
सरकार ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) का ये डेटा पूरी तरह से वास्तविकता से परे है। उनका डेटा संकलन न तो किसी सांख्यिकी मॉडल और न ही किसी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। दरअसल, डब्ल्यूएचओ ने अपनी रिपोर्ट में जनवरी 2020 से दिसंबर 2021 के बीच भारत में कोरोना से 47 लाख मौतें होने का दावा किया है और इसे दुनिया में मौतों के कुल आंकड़े का एक तिहाई बताया है। रिपोर्ट में कोरोना से दुनिया भर में 1.5 करोड़ मौतें होने का दावा किया गया है, जबकि आधिकारिक आंकड़ा करीब 60 लाख का है।
Shabddoot – शब्द दूत Online News Portal