@शब्द दूत ब्यूरो (04 अप्रैल, 2022)
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चंपावत से चुनाव लड़ने की खबरों से कांग्रेस ने चैन की सांस ली है। दरअसल कांग्रेस को भय सता रहा था कि 2007 और 2012 की तरह 2022 में भी मुख्यमंत्री को विधायक बनाने के लिए कहीं विपक्ष का विधायक अपनी सीट न छोड़ दे। धामी को मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय के बाद कांग्रेस खेमे में घबराहट महसूस की जा रही थी।
कैलाश गहतोड़ी पहले विधायक थे, जिन्होंने धामी के खटीमा से चुनाव हारने के बाद उनके लिए अपनी चंपावत की सीट छोडऩे की पेशकश की थी। खैर, यह भाजपा का अंदरूनी मामला है, लेकिन इससे राहत कांग्रेस को मिली है। कांग्रेस को भय सता रहा था कि 2007 और 2012 की तरह 2022 में भी मुख्यमंत्री को विधायक बनाने के लिए कहीं विपक्ष का विधायक अपनी सीट न छोड़ दे।
बता दें कि 2007 में भाजपा के भुवन चंद्र खंडूड़ी के लिए कांग्रेस के टीपीएस रावत और 2012 में कांग्रेस के विजय बहुगुणा के लिए भाजपा के किरण मंडल ने विधानसभा सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। भाजपा नेतृत्व द्वारा धामी को ही मुख्यमंत्री बनाने के निर्णय के बाद कांग्रेस खेमे में घबराहट फैल गई थी कि कहीं इतिहास फिर न दोहरा दिया जाए। इसीलिए कांग्रेस अब कुछ सुकून महसूस कर रही है।
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