@शब्द दूत ब्यूरो (03 अप्रैल 2022)
इधर कांग्रेस के भीतर गुटबाजी नहीं थम रही तो उधर बढ़े हुए कुनबे के साथ अध्यक्ष की अनुपस्थिति पार्टी को और दयनीय हालत में धकेल रही है। कुल मिलाकर राज्य में चुनावी हार के बाद भी कांग्रेस उत्तराखंड में राष्ट्रीय पार्टी जैसी फिलहाल नहीं दिख रही है।
इधर, नेता प्रतिपक्ष का चयन आपसी गुटबाजी के चलते नहीं हो पा रहा है। उधर, पार्टी का अध्यक्ष पद भी फिलहाल खाली है। ऐसे में दिग्गज कांग्रेस नेता और अपनी ही पार्टी के नेताओं की आंख की किरकिरी बने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत लगातार भाजपा विधायकों और मंत्रियों से मुलाकात कर रहे हैं। हालांकि इन मुलाकातों को सामान्य शिष्टाचार बताया जा रहा है, लेकिन इतना तो तय है कि उत्तराखंड में कांग्रेस की हांडी में कुछ न कुछ जरूर पक रहा है।
प्रदेश अध्यक्ष के इस्तीफे के साथ कई अन्य नेताओं के अपने पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी की हालत पहले ही पस्त है। इधर, एक बड़े कांग्रेस नेता के भाजपा में शामिल होने की अटकलों ने फिर से जोर पकड़ लिया है। सूत्रों के अनुसार इस नेता को राज्यपाल बनाया जा सकता है। तो क्या आने वाले दिनों में राज्य में कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लग सकता है।
अगले वर्ष राज्य में निकाय चुनाव होने हैं। चुनाव परिणामों से गदगद भाजपा अभी से कांग्रेस के किले में सेंध लगाने में जुट गई है। सेंध लगाने के लिए उसे अपनी तरफ से खुद कोई खास मेहनत नहीं करनी पड़ रही है क्योंकि कांग्रेस की भीतरी कलह उसे आसानी से यह अवसर दे भी रही है।
माना ये भी जा रहा है कि राज्य में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व निकट भविष्य में कांग्रेस के छोटे-बड़े नेताओं को टटोल सकता है। क्योंकि रणनीतिक दृष्टि से भी भाजपा कांग्रेस को कमजोर तो करना चाहेगी ही। अगर समय रहते कांग्रेस नहीं चेती तो पार्टी को राज्य में भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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