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काशीपुर :चिकित्सा के क्षेत्र में जनता के बीच बेहतर पहचान बनाता स्पर्श हॉस्पिटल

@शब्द दूत ब्यूरो (25 मार्च 2022)

काशीपुर। कहने को तो काशीपुर नगर एवं क्षेत्र में अनेक चिकित्सालय हैं मगर प्राइवेट चिकित्सा के क्षेत्र में स्पर्श मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल ने अल्प अवधि के बावजूद जनता के बीच जो विश्वसनीयता और पहचान बनाई है वह हकीकत में इस बात को तस्दीक करती है कि वास्तव में भगवान डॉक्टर का रूप होते हैं।

इस अस्पताल में खास बात यह है कि रोगी और उनके तीमारदारों की जेब पर निगाह रखने के बजाय रोगी के शीघ्र स्वस्थ और प्रसन्न होने पर ध्यान दिया जाता है । यही कारण है कि जीवन से निराश और उदास रोगी यहां जीवनदान पाकर दुआएं देते हुए खुशी खुशी अपने परिजनों के साथ घर लौटते हैं। मुरादाबाद रोड पर ढेला नदी के पुल के पास स्थित स्पर्श हॉस्पिटल के संचालक डॉ रजनीश शर्मा ने बताया कि उनके हॉस्पिटल में चिकित्सा से जुड़ी लगभग सभी सुविधाएं उपलब्ध है और कुछ सुविधाएं ऐसी है जो जरूरत पड़ने पर वाजिब खर्चे पर रोगियों को उपलब्ध करा दी जाती है। उन्होंने बताया कि हमारे यहां आने वाले हर रोगी का जीवन बचाना ही हमारी पहली प्राथमिकता होती है। यदि यह लगता है कि रोगी को बड़े शहरों वाली अत्याधुनिक उपचार सुविधा की वास्तव में आवश्यकता है तो हमारे द्वारा रोगी को बेवजह रोक कर उससे पैसा वसूलते रहने के बजाय उसे अन्यत्र ले जाने की सलाह दे दी जाती है। ताकि रोगी के परिजनों पर अनावश्यक खर्च भी न पड़े और उनके रोगी की समय रहते आवश्यक उपचार मिल जाने पर जान भी बच जाए।

इसके बाद भी जो लोग हमारे हास्पिटल पर विश्वास करके बाहर जाने से मना कर देते हैं उनके उपचार पर हमारे हॉस्पिटल के चिकित्सकों द्वारा कोई कमी नहीं छोड़ी जाती और दिन रात मेहनत कर उनको स्वास्थ लाभ दिया जाता है और देखने में आया है कि रोगी और उसके तीमारदारों के विश्वास और हमारी मेहनत के चलते जिस रोगी को हम अत्यंत गंभीर मान रहे थे वह भी हमारे अनुभवी और योग्य चिकित्सकों के उपचार से स्वस्थ हो खुशी खुशी अपने घर चला जाता है ।

डॉ रजनीश साफ कहते हैं कि चिकित्सा पेशा नहीं बल्कि एक मिशन है और इस मिशन को हमने कई बार सिद्ध करके भी दिखाया है। वे बताते हैं कि करीब 1 वर्ष पूर्व एक वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जैसे ही हमें सूचना मिली तो हमने तत्काल एंबुलेंस भेजकर सभी घायलों को गंभीर हालत देखते हुए बगैर कोई जान पहचान पता न होते हुए भी प्राथमिक उपचार दिए जाने की अपनी पहली जिम्मेदारी निभाई और जब सभी घायलों को होश आ गया तो उनके परिजनों को सूचना दी गई। जब तक परिजन पहुंचे तो वें सभी यह देखकर आश्चर्यचकित रह गए कि उनके मौजूद न होते हुए भी स्पर्श हास्पिटल के चिकित्सकों ने उपचार का पैसा मिलेगा भी या नहीं इसकी चिंता न करते हुए केवल मानवीय धर्म निभाया और उनके घायल परिजनों का उपचार कर उन्हें उस स्थिति में ला दिया कि उनका जीवन सुरक्षित बच गया। बाद में इनके कुछ परिजन परिचित भी निकल आए जिन्होंने स्पर्श हास्पिटल की दिल से तारीफ की और डॉक्टरों का शुक्रिया अदा किया ।

डॉ रजनीश शर्मा बताते हैं कि उनके यहां सरकार की आयुष्मान योजना के तहत रोगियों का सरकारी मानकों के तहत सस्ता और बेहतर उपचार किया जाता है। हमारा प्रयास होता है कि रोगी की जेब से कोई पैसा खर्च न हो और वह ठीक होकर अपने घर चला जाए ।इनका कहना है कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा उपलब्ध कराने हेतु आवेदन किया जा चुका है मगर सरकारी कार्यों की कछुआ चाल के चलते अभी तक फाइल पास नहीं हो सकी, मगर प्रयास निरंतर जारी है।

उल्लेखनीय है कि दोनों बार के लॉकडाउन डाउन के दौरान स्पर्श हॉस्पिटल ने कोरोना काल में दिन रात मेहनत करके जिस तरह से रोगियों को जीवनदान दिया वह अपने आप में एक मिसाल है।  बावजूद इसके कुछ लोगों ने इस हॉस्पिटल को बदनाम करने के षड्यंत्र भी रचे मगर वह परवान नहीं चढ़ सके और आज यह हॉस्पिटल रोगियों को बेहतर उपचार देकर उन्हें जीवनदान देने में एक नई पहचान बनाता जा रहा है। जहां पैसा नहीं बल्कि रोगी की सेवा को ही परमेश्वर की सेवा मानकर अन्जाम दिया जा रहा है। यदि रोगी गरीब हो तो उस पर विशेष मेहरबानी भी रखी जाती है ताकि गरीब रोगियों के परिजनों पर किसी तरह की विपत्ती का पहाड़ न टूटे और वें सस्ता व सुलभ उपचार कराकर अपने रोगी को ले जा सके।

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