होली पर्व पर प्रार्थना
पर्व होली में ईश्वर से है यही प्रार्थना,
भरे दामन सभी का सुख समृद्धि से।
हो जाये सभी के दुःख,दारिद दहन,
मुक्त हो जाये भारत यह अपराध से।।
सब सुखी हों चलें निज राह पर,
कार्य अपना करें सब सद्बुद्धि से।
हो सभी में राष्ट्हित का चिंतन सदा,
जग आलोकित करें निज संस्कार से।।
होलिका में दहन
“दहन” करना है होलिका में तो दहन करें-
अपने कुत्सित विचारों का,
अपने दुसंस्कारों का
अपने अभिमान का
अपने अहंकार का
अपने स्वार्थ का
अपने दुर्गुणों का
“दहन” करना है होलिका में तो दहन करें-
समाज में फैली बुराइयों का
समाज में फैली भुखमरी का
समाज में व्याप्त गरीबी का
समाज में फैली अराजकता का
समाज में फैली अशिक्षा का
समाज में फैली छुआछूत का
समाज में व्याप्त कुरीतियों का
बचाइए “दहन” हो रहे प्रहलाद रूपी भक्ति,ज्ञान,प्रेम,संस्कार,संस्कृति,राष्ट्र,शिक्षा,परोपकार को।
यही होलिका दहन का वास्तविक स्वरूप एवं अर्थ है।आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
ग्राम व पोस्ट खखैचा प्रतापपुर हंडिया प्रयागराज उत्तर प्रदेश।
संपर्क सूत्र – 09956629515
08318757871
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