अखिल भारतीय साहित्य परिषद झाँसी की मासिक साहित्य संगोष्ठी में सुकवि कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव सखा के संपादन में प्रकाशित काव्य संग्रह ” काव्य कलश ” के छठवें अंक का विमोचन वरिष्ठ साहित्यकार डा. रामशंकर भारती की अध्यक्षता में आयोजित सादे समारोह में किया गया।सैनी गार्डन में संपन्न हुयी साहित्य संगोष्ठी में मुख्य अतिथि चर्चित साहित्यकार डा.ओमप्रकाश हयारण दर्द और वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में साहित्यसेवी भगवान सिंह कुशवाहा राही व आशुकवि जी.पी. वर्मा मधुरेश उपस्थित रहे।
विमोचित काव्य कृति ” काव्य कलश ” पर समीक्षात्मक
टिप्पणी करते हुए डा. रामशंकर भारती ने कहा कि कविता का कार्य मनोरंजन करना नहीं है । कविता हमें मानवीय मूल्यों से जोड़ती है। ” काव्य कलश ” में सम्मलित पाँच कवियों में सर्वश्री नाथूराम शर्मा आर्येन्दु ( अब कीर्तशेष ) पूर्व प्राचार्य डा. ओमशरण अत्रि , विजय प्रकाश सैनी , कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव ” सखा ” एवं राजेंद्र प्रताप श्रीवास्तव की रचनाओं से यही सत्य उद्घाटित होता है।
वहीं विशिष्ट अतिथि साहित्यकार भगवान सिंह राही ने अपने उद्वोधन में कहा कविता को लोकमंगल की संवाहिका है। मुख्य अतिथि डा. ओम प्रकाश हयारण दर्द ने काव्य कलश के प्रकाशन पर प्रसन्नता व्यक्त की।
संगोष्ठी का शुभारम्भ राजेश तिवारी मक्खन की वाणी वंदना से हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ कवि साकेत सुमुन चतुर्वेदी , निहाल चंद्र शिवहरे , कवयित्री सुमन मिश्रा , दिनेश शर्मा चिंतक , डा. रमेशचंद बुंदेला , अशोक मिश्रा आदि ने होली को समर्पित अपनी रंगीन रचनाओं से फागोत्सव मनाया। संगोष्ठी का सफल संचालन कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव सखा ने किया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के मंत्री तथा कार्यक्रम के आयोजक विजय प्रकाश सैनी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।
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