बिहार के लोग जहां भी जाएं अपना परचम लहरा ही देते हैं। चाहे वह सात समंदर पार मारिशस और त्रिनिदाद का मामला हो या अपने ही देश का बिहार के लोग केवल सेवा क्षेत्र में नहीं बल्कि राजनीति में भी अग्रणी हैं।
@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (11 मार्च, 2022)
पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी का एक बयान काफी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने कहा था कि पंजाब में बिहार और यूपी के भैयों को नहीं घुसने देंगे। हालांकि पंजाब के लाेगों ने ही चन्नी के बयान का समर्थन नहीं किया और उन्हें सत्ता से बाहर करते हुए बिहार के लाल को अपना विधायक चुन लिया।
आपको यह जानकर ताज्जुब हो सकता है कि हालिया विधानसभा चुनावों में केवल पंजाब में ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में भी बिहार के रहने वाले लोग विधायक का चुनाव जीते हैं।
उत्तर प्रदेश की बलिया सदर सीट से चुनाव जीतने वाले दयाशंकर सिंह मूलत: बिहार के बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड अंतर्गत छोटका राजपुर के रहने वाले हैं। इनका गांव बक्सर के दियारा इलाका में पड़ता है। गांव के सामने गंगा पार करते ही बलिया है। इस क्षेत्र के काफी लोग बलिया में रहते और व्यवसाय करते हैं।
पिछली बार इनकी पत्नी स्वाति सिंह लखनऊ की सरोजिनीनगर सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीती थीं और योगी आदित्यनाथ सरकार में मंत्री भी बनी थीं। इस बार स्वाति को तो टिकट नहीं मिला, लेकिन उनके पति ने बतौर भाजपा प्रत्याशी जरूर जीत दर्ज की है। दयाशंकर की जीत पर उनके गांव में लोगों ने खूब खुशियां मनाईं।
गोपालगंज जिले के रहने वाले कुंवर विजय प्रताप पंजाब में अमृतसर उत्तरी सीट से आप के टिकट पर चुनाव जीतकर विधायक बने हैं। वे भारतीय पुलिस सेवा में कार्यरत थे। आइजी के पद पर पहुंचने के बाद उन्होंने पिछले साल नौकरी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति का रास्ता पकड़ा।
विजय प्रताप को पंजाब का गृह मंत्री बनाए जाने की चर्चा चल रही है। सिधवलिया प्रखंड के करसघाट गांव के स्व. रामनाथ कुंवर के ज्येष्ठ पुत्र कुंवर विजय प्रताप ने अपनी पढ़ाई करसघाट में शुरू की। झझवा से मिडिल व शाहपुर से मैट्रिक की परीक्षा पास की। उन्होंने पटना साइंस कालेज से इंटर व पटना यूनिवर्सिटी से बीए व एमए किया। पटना में ही रहकर 2001 में यूपीएससी में सफलता की। आइपीएस के रूप में उन्हें पंजाब कैडर मिला।
गोपालगंज जिले से ही ताल्लुक रखने वाले अरविंद पांडेय उत्तराखंड में विधायक चुने गए हैं। वे उत्तराखंड की दो अलग-अलग सीटों बाजपुर और गदरपुर से लगातार पांचवीं बार विधायक का चुनाव जीतने में सफल हुए हैं।
अरविंद पांडेय के पिता वीरेंद्र पांडेय गोपालगंज जिले में विजयीपुर प्रखंड के अपने गांव से उत्तराखंड की एक शुगर मिल में नौकरी करने गए थे। इसके बाद उनका परिवार उत्तराखंड में ही बस गया। बाजपुर सीट एससी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्होंने अपना क्षेत्र बदला था, लेकिन उनकी जीत का सिलसिला लगातार जारी रहा।
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