एरोपोनिक तकनीक का इजाद हरियाणा के करनाल जिले में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा किया गया है। इस तकनीक की खास बात यह है कि खेती में इस तकनीक से मिट्टी और जमीन दोनों की कमी पूरी की जा सकती है।
@नई दिल्ली शब्द दूत ब्यूरो (08 मार्च, 2022)
किसान अब नई तकनीक से आलू की खेती करेंगे। इस तकनीक का नाम एरोपोनिक तकनीक है। जिसके जरिए से अब जमीन की जगह हवा में आलू की खेती होगी और इससे पैदावार भी 10 गुना तक बढ़ जाएगी। यह कहना है हरियाणा के करनाल स्थित आलू प्रोद्योगिकी केंद्र से आलू खेती की नई तकनीक का अध्ययन कर लौटे सहरसा के अगवानपुर कृषि अनुसंधान केंद्र के विज्ञानी पंकज कुमार राय का।
आपको यह जानकर आश्चर्य तो जरूर होगा कि हवा में आलू की खेती करना कैसे संभव है। लेकिन यह संभव हो गया है। दरअसल, एरोपोनिक आलू खेती की एक ऐसी तकनीक है जिसके द्वारा बिना मिट्टी और ज़मीन के आलू की खेती की जा सकती है। इस तकनीक से मिट्टी और जमीन दोनों की कमी पूरी की जा सकती है।
एरोपोनिक तकनीक का इजाद हरियाणा के करनाल जिले में स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र द्वारा किया गया है। इस तकनीक की खास बात यह है कि खेती में इस तकनीक से मिट्टी और जमीन दोनों की कमी पूरी की जा सकती है और तो और इस तकनीक से खेती करने पर आलू की पैदावार 10 गुना तक बढ़ जाएगी। सरकार द्वारा इस तकनीक से आलू की खेती करने की मंजूरी दे दी गई है।
बता दें तो आलू प्रौद्योगिकी केंद्र करनाल का इंटरनेशनल पोटैटो सेंटर के साथ एमओयू हुआ है। एमओयू होने के बाद भारत सरकार द्वारा एरोपोनिक तकनीक से आलू की खेती करने की मंजूरी दे दी गई है।
एरोपोनिक तकनीक से किसानों को बहुत ज़्यादा फायदा होगा, क्योंकि इससे किसान कम लागत में ही आलू की ज़्यादा से ज़्यादा पैदावार कर सकते हैं और ज़्यादा पैदावार होने से उनकी आमदनी भी बढ़ेगी। इस तकनीक के जो विशेषज्ञ हैं, उनका ऐसा कहना है कि इस तकनीक में लटकती हुई जड़ों के द्वारा उन्हें पोषण दिए जाते हैं। जिसके बाद उसमें मिट्टी और ज़मीन की ज़रूरत नहीं होती।
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